दिवाली के बिगड़ते प्लान और मन में उठते सवाल

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प्रियम्वदा !

नवरात्रि की थकान और गरबा का आनंद

रात एक डेढ़ बजे तक जागते रहो, और सवेरे फिर भी सात बजे तक उठना पड़े, उसी का नाम नवरात्रि है। इन नौ दिनों में लगभग सबकी ही नींद मानो कम ही हो जाती है। हाँ ! मुझे तो दिवसभर आलस अनुभव होता है, लेकिन फिर भी नवरात्री का उत्साह और आनंद ही ऐसा है।

बात तो कुछ है नहीं मेरे पास, बस यूँ ही फ़ोन चार्जिंग में लगाया था, तो तुम से बातें करने आ गया। प्रियम्वदा ! मुझे यह बड़े बड़े आयोजन वाली नवरात्री बिलकुल पसंद नहीं। मुझे पसंद है, शेरी गरबा, या फिर वह गरबा जो गाँवों में होता है। जहाँ सिर्फ गरबा होता है। हम तो हरदिन अपना साउंड सिस्टम सेटअप करते है, और गरबा ख़त्म होने पर वापिस सारा सिस्टम समेटते भी है। हालाँकि बड़ा सिस्टम नहीं है, फिर भी लाउडस्पीकर्स को रूम से लाने - ले जाने में बहुत थकान अनुभव होती है।

शारीरिक मेहनत, समय की कमी और साइकिल चलाने का सपना

मैं बिलकुल भी शारीरिक श्रम नहीं कर रहा हूँ। मुझे लगता तो है, कि कुछ न कुछ श्रमपूर्ण काम करना चाहिए, लेकिन उस महेनत के लिए समय? समय कहाँ से लाऊँ? दिवसभर तो ऑफिस में होता हूँ, रात में मानसिक थकान इतनी होती है, कि कोई भी शारीरिक परिश्रम करने की इच्छा ही नहीं होती।

बिच में तो ख्याल भी आया था, कि एक साइकिल खरीद लू, रवि-रविवार को कहीं साइकिल से दूर तक चक्कर मार आने का। हफ्ते में एकाध दिन का श्रम भी बाकी दिनों की समतूला बना सकता है।

वैसे यह सारे मुंगेरीलाल के हसीं सपने जैसा है।

नवरात्रि के बाद दिवाली की दस्तक

नवरात्रि भी हो गयी, दशहरा भी गया.. अब तो दिवाली आनी बाकी है बस.. दिवाली मांगने वाले तो शुरू भी हो गए। कल ही खाखी रंग वाले कपडे पहने हुए पैसे मांगने आए थे। ऑफिस के सोफे पर ऐसे पसरे थे, जैसे उनकी सालों से जान-पहचान हो। बेझिझक पैसे मांगते है..!

गुजरात में सोलर रूफटॉप सब्सिडी और मेरा सवाल

खैर, आज इंस्टा रील्स में एक खबर आयी, गुजरात सरकार ने सोलर रूफ टॉप पर सब्सिडी में और अधिक छूट दी है। मजेदार बात यह है कि इस सब्सिडी में भी कैटेगरी के अनुसार लाभ है। गुजरात सरकार ने रूफटॉप सोलर सिस्टम लगवाना आम लोगों के लिए सस्ता बनाने के उद्देश्य से नई योजना की घोषणा की है। इसके अनुसार केंद्र सरकार की सब्सिडी और लाभार्थी के योगदान के बाद बचने वाली पूरी रकम राज्य सरकार भरेगी। उदाहरण के तौर पर, यदि 1 किलोवाट के सोलर सिस्टम की कीमत ₹54,000 है, तो सामान्य वर्ग के परिवार को केवल ₹5,400 और SC/ST वर्ग के परिवार को ₹2,700 देने होंगे, जबकि केंद्र सरकार ₹32,400 की सब्सिडी देगी और बाकी राशि गुजरात सरकार भरेगी।

क्या सब्सिडी जाति के आधार पर होनी चाहिए या गरीबी के आधार पर?

कभी कभी मुझे लगता है प्रियम्वदा, कि मेरा तो देश-प्रेम भी एकतरफा है। मैं तो अपने देश के लिए सब कुछ कर सकता हूँ, पर यह देश मेरे लिए क्या कर रहा है? कोई भी सरकार हो, सवर्णों को लूटने से नहीं चुकती। फीस से लेकर यह सब्सिडी तक। सब्सिडी गरीबी के आधार पर देनी चाहिए थी, न कि जाति के आधार पर? और यह तो वैसे भी बिजली से जुडी बात है। गरीब के घर में तो वैसे भी ac नहीं होगा, उसका बिल कितना ही आता होगा?

गुलाबी ठंड, टहलना और लिखने की इच्छा

अभी रात में घर जाते समय थोड़ी थोड़ी ठण्ड अनुभव होती है। मौसम थोड़ा गुलाबी तो होता जा रहा है। कल रात ग्राउंड में थोड़ी देर टहलने गया था, तो कुछ देर इच्छा हुई कुछ लिखने की, पर वह इच्छा मजबूत होती, उससे पूर्व ही घर लौट जाना पड़ा।

दिवाली की रोडट्रिप का बिगड़ता प्लान

अरे हाँ ! इस बार दिवाली पर कहीं भी न जा पाउँगा। हर बार तो मौका देखकर निकल पड़ता हूँ। इस बार सारे ही प्लान्स बन-बिगड़ रहे है। कभी गोवा, तो कभी उदयपुर, और कभी यहीं गुजरात में ही किलेश्वर घुमली का मन होता है। सब सही होने पर भी किसी न किसी बात की कमी हो ही जाती है।

जिम्मेदारियाँ, अकेले घूमने की इच्छा और मेरा अहम्

कभी कभी लगता है प्रियम्वदा ! अकेले निकल पडूँ, लेकिन कैसे.. जिम्मेदारियां ही इतनी सारी है। अहम् का तो कोई पार ही नहीं, मैं कईं बार कह भी देता हूँ, कि मेरे बिना कैसे होगा? हालाँकि किसी के भी बिना कभी कुछ रुकता कहाँ है? पर मुझे मैं और मेरा अहम् इतना प्यारा है, जिसकी कोई हद्द नहीं।

चलो यार, कुछ लिखने को मन ही नहीं करता अब।

विदा दो, शुभरात्रि !

२२/१०/२०२६


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1. नवरात्रि में गरबा करने का अनुभव कैसा होता है?

नवरात्रि में गरबा उत्साह और आनंद का अवसर होता है। शेरी गरबा और गाँवों में होने वाला पारंपरिक गरबा उन लोगों को पसंद आ सकता है जिन्हें बड़े आयोजनों के बजाय सादगी पसंद है।

2. ऑफिस की व्यस्तता के बीच शारीरिक श्रम के लिए समय कैसे निकालें?

ऑफिस के काम और मानसिक थकान के बीच शारीरिक गतिविधियों के लिए समय निकालना मुश्किल हो सकता है। सप्ताहांत में साइकिल चलाना या टहलना एक विकल्प हो सकता है।

3. गुजरात की सोलर रूफटॉप सब्सिडी में किस तरह का लाभ मिलता है?

पोस्ट में वर्णित योजना के उदाहरण के अनुसार, केंद्र और राज्य सरकार की सब्सिडी के बाद लाभार्थी को सोलर सिस्टम की लागत का शेष हिस्सा देना होता है। वास्तविक पात्रता, योगदान और सब्सिडी की राशि के लिए गुजरात सरकार की आधिकारिक योजना के नवीनतम नियम देखना जरूरी है।

4. दिवाली पर रोडट्रिप की योजना बनाते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

दिवाली की रोडट्रिप के लिए समय, जिम्मेदारियाँ, यात्रा का बजट और गंतव्य तय करना उपयोगी होता है। परिस्थितियों के अनुसार योजनाओं में बदलाव भी करना पड़ सकता है।

5. क्या अकेले यात्रा करने के लिए जिम्मेदारियों से समय निकालना संभव है?

अकेले यात्रा करने की इच्छा और रोजमर्रा की जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं होता। पहले से योजना बनाकर और उपलब्ध समय के अनुसार यात्रा तय करके इस इच्छा को पूरा करने का प्रयास किया जा सकता है।

📖 थोड़ी देर और ठहरो प्रिय पाठक,


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