नए पाठकों के लिए पढ़ने योग्य 10 सर्वश्रेष्ठ हिंदी उपन्यास || Best Hindi novels for beginners..

0

पढ़ने की ओर लौटते हुए..

    प्रियम्वदा !

    वैसे तो प्रतिदिन लिखने से विराम तो ले लिया है मैंने। लेकिन सच बताऊँ, तो मुझे काफी खाली-खालीपन सा महसूस होता है। जैसे मैंने अपना वह दिलायरी का समय बस इंटरनेट सर्फिंग को सौंप दिया है। लेकिन मैंने सदुपयोग भी किया है इस समय का। मैंने कुछ बुक्स हाईलाइट की है, जो समय मिलने पर पढता रहूँगा। फ़िलहाल मैं एक पुस्तक पढ़ भी रहा हूँ। लेकिन इस दिलायरी के लिए जो समय खंड मैंने अलॉट किया हुआ था, वह तो अब भी इंटरनेट सर्फिंग ही खाए जा रहा है। 


    आज का यह खत तुम्हे लिख तो रहा हूँ, लेकिन उन तमाम लोगों के लिए भी है, जिन्हे उपन्यास पढ़ने में रूचि हो। मैं अगर अपनी बात करूँ, तो मुझे पढ़ने का शौक लगा था उपन्यासों से ही। लेकिन हाँ, मैं गुजराती उपन्यास ही पढ़ा करता था। गुजराती में नवलकथा कहते है। एक ऐसी कहानी, जो दोसौ-तीनसौ पन्नों में हृदय के तमाम स्पंदनों की गति को नियंत्रित कर जाए। लेकिन आज कुछ ऐसी ही हिंदी उपन्यासों के बारे बता रहा हूँ, जो मैंने इंटरनेट के गलियारे से पढ़ने के शौकीनों के लिए नींव का काम करें, ऐसे कुछ खोजें है। उनमे से कुछ मैं पढ़ भी रहा हूँ। 


किताब पढ़ते हुए वही परिचित पात्र — पढ़ने की ओर लौटने का शांत भाव

हिंदी उपन्यास पढ़ने की शुरुआत क्यों ज़रूरी है?

    हिंदी साहित्य में उपन्यासों की दुनिया बड़ी विशाल है। कभी प्रेम भरी, कभी संघर्ष से जूझती हुई, तो कभी समाज की कड़वी सच्चाइयों को प्रस्तुत करती हुई। लेकिन जो पाठक हिंदी साहित्य की शुरुआत करना चाहता है, उसके लिए यह तय करना मुश्किल हो जाता है, कि शुरुआत कहाँ से की जाए? पहली किताब कौनसी हो? इस लेख में मैं ऐसे 10 सर्वश्रेष्ठ हिंदी उपन्यास साझा कर रहा हूँ, जो नए पाठकों के लिए न सिर्फ सरल है, बल्कि पढ़ने में रूचि और बढ़ा देते है। 


नए पाठकों के लिए पढ़ने योग्य 10 सर्वश्रेष्ठ हिंदी उपन्यास || Best Hindi novels for beginners

1. गुनाहों का देवता – धर्मवीर भारती

    यूँ तो मैंने भी हिंदी साहित्य बहुत ज्यादा पढ़ा नहीं है। लेकिन यह एक पुस्तक है, जो मेरे मन में एक छाप तो छोड़ ही चूका है। मैंने चाहे इसे इंटरनेट की दुनिया में ओवरहाइप माना हो, क्योंकि सोशल मीडिया पर इस बुक की खूब तारीफें होती है। मैंने यह पढ़ते हुए महसूस किया था, कि प्रेम में विरह को किस तरह से आदर्श के पद पर स्थापित किया जा सकता है। चन्दर और सुधा का प्रेम कोई इज़हार का मोहताज़ नहीं था। वह भीतर ही भीतर पलता, डरता और समाज के बंधनों से टकराता हुआ प्रेम है। भाषा सहज, संवाद सरल और भावनाएं इतनी सच्ची है, कि पाठक बिना थके पन्ने पलटता रहता है। यही कारन है, कि यह उपन्यास नए पाठको के लिए एक आदर्श शुरुआत बन सकता है। (मेरी गुनाहों के देवता की समीक्षा यहाँ पढ़ सकते है।)


2. राग दरबारी – श्रीलाल शुक्ल

    मैं फ़िलहाल यह उपन्यास पढ़ रहा हूँ। व्यंग्यात्मक शैली, या जिसे आज पंचलाइन के नाम पर खपा सकते है, वैसे वाक्य इस उपन्यास में भरपूर है। उपन्यास की शुरुआत में ही जिस प्रसंग का वर्णन है, वह आज भी आमजीवन में लागू होता है। 1968 में प्रकाशित यह उपन्यास उस समय के राजनीतिक और सामाजिक ढाँचे का खूब मजेदार ढंग में वर्णन करता है। लेखक श्रीलाल शुक्ल के वर्णित प्रसंग आज भी आमजीवन में कईं बार रेलटेबले लगते है। यह उपन्यास उपदेश नहीं देता है, न ही कोई विचारधारा को थोपता है, बस परिस्थितियां सामने रख देता है, और पाठक को सोचने पर मजबूर कर देता है। नए पाठकों के लिए राग दरबारी पढ़ना इस लिए भी आवश्यक है, यहाँ सिर्फ भावुकता नहीं, बल्कि समाज को, सामाजिक व्यवस्था को समझने का माध्यम बन सकता है। 


3. निर्मला – प्रेमचंद

    1927 में प्रकाशित यह कहानी दहेज, विवाह और स्त्री-जीवन की पीड़ा को बेहद सहज भाषा में कहती हुई कहानी है। उपन्यास की नायिका निर्मला का विवाह उम्र में उससे बड़े पुरुष से केवल आर्थिक दबावों के कारण कर दिया जाता है। और यहीं से उसका जीवन मानसिक पीड़ा, संदेह, और पारिवारिक तनावों में उलझता जाता है। प्रेमचंद जी ने इस उपन्यास में भावुकता से अधिक सामाजिक तथ्य पर जोर दिया अनुभव होता है। निर्मला इस लिए भी महत्वपूर्ण है, कि यह सिर्फ स्त्री कहानी नहीं कहता, बल्कि उस व्यवस्था की आलोचना करता है, जो स्त्री को निर्णय से वंचित रखती है। नए पाठकों के लिए यह उपन्यास हिंदी साहित्य को समझने के लिए ठोस और विश्वसनीय शुरुआत माना जा सकता है। 


4. मैला आँचल – फणीश्वरनाथ रेणु

    फणीश्वरनाथ रेणु का 1954 में प्रकाशित यह उपन्यास गाँव, गरीबी, राजनीति और मानवीय रिश्तों की जीवंत तस्वीर। यह उपन्यास आपको ज़मीन से जोड़ देता है। प्रमुखतः स्वतंत्रता के बाद भारत के ग्रामीण जीवन को केंद्र में रखकर बिहार के एक गाँव की सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक संरचना को प्रस्तुत करता यह उपन्यास पाठक को बांधे रखता है। स्थानीय बोली, लोकगीत, और ग्रामीण मुहावरे इस उपन्यास मैला आँचल को असाधारण रूप से जिवंत बना देते है। इंटरनेट पर मैंने पढ़ा था, मैला आँचल को हिंदी साहित्य का पहला सफल आंचलिक उपन्यास माना जाता है। आंचलिक माने किसी एक क्षेत्र विशेष का। नए पाठकों के लिए यह रचना भारतीय समाज की जड़ों से परिचित होने का सशक्त माध्यम बनती है।


5. चित्रलेखा – भगवतीचरण वर्मा

    भगवतीचरण वर्मा द्वारा लिखित चित्रलेखा वर्ष 1934 में प्रकाशित हुआ यह उपन्यास पाप-पुण्य, नैतिकता और जीवन के अर्थ पर प्रश्न उठाता हुआ दार्शनिक उपन्यास। छोटा है, लेकिन बहुत सोचने पर मजबूर करता है। उपन्यास की कथा एक गणिका चित्रलेखा के इर्दगिर्द घूमती है। कर्म का मूल्य सामाजिक मान्यताओं से नहीं, बल्कि भावना और उद्देश्य से स्थापित होता है, यह विचार इस कहानी का केंद्र है। भाषा सरल और प्रवाहमय है, जिससे यह गहन विषयों के बावजूद बोझिल नहीं लगता।


6. अंधा युग – धर्मवीर भारती

    धर्मवीर भारती का एक और उपन्यास इस हिंदी साहित्य की सूची में इस कारण से भी समाहित किया गया है, कि अँधा युग.. नाम में ही स्पष्टता है, कि यह कृति महाभारत के बाद की नैतिक टूटन पर आधारित यह कृति नए पाठकों को गहराई से सोचने की आदत डालती है। विजय के बावजूद चारों ओर नैतिक शून्यता, अपराधबोध और मानवीय विघटन दिखाई देता है। अंधा युग नए पाठकों के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह उन्हें इतिहास या मिथक से आगे ले जाकर वर्तमान जीवन के नैतिक संकटों पर सोचने की आदत डालता है—बिना किसी उपदेश के, केवल प्रश्नों के सहारे। गांधारी, धृतराष्ट्र, युयुत्सु और अश्वत्थामा जैसे पात्रों के माध्यम से भारती यह प्रश्न उठाते हैं कि क्या जीत वास्तव में जीत होती है?


7. बाणभट्ट की आत्मकथा – हजारीप्रसाद द्विवेदी

    बाणभट्ट की आत्मकथा, इतिहास और कल्पना का सुंदर संगम। अगर आप भाषा की सुंदरता महसूस करना चाहते हैं, तो यह उपन्यास पढ़िए। उपन्यास में इतिहास और कल्पना का संतुलित मेल है—जहाँ तत्कालीन सामाजिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक वातावरण को कल्पनाशील विस्तार के साथ प्रस्तुत किया गया है। 1946 में प्रकाशित यह कृति संस्कृत के महान लेखक बाणभट्ट के जीवन को आधार बनाकर लिखी गई है। भाषा की गरिमा और साहित्यिक सौंदर्य को महसूस करने के लिए यह उपन्यास एक उत्कृष्ट कृति माना जाता है।


8. शेखर: एक जीवनी – अज्ञेय

    यह उपन्यास शेखर नामक युवक के आंतरिक संघर्ष और मानसिक उथल-पुथल को केंद्र में रखता है। शेखर समाज, प्रेम, नैतिकता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के प्रश्नों में उलझा रहता है। कहानी घटनाओं की बजाय उसके विचारों, भावनाओं और निर्णयों के इर्द-गिर्द घूमती है, और पाठक को उसके मानसिक और भावनात्मक अनुभवों में डुबो देती है। यह उपन्यास मुख्यतः व्यक्तित्व की खोज और अस्तित्वगत प्रश्नों की दास्तान है। तथ्यात्मक रूप से यह कृति हिंदी साहित्य में प्रयोगवादी चेतना की महत्वपूर्ण रचना मानी जाती है। भाषा चिंतनशील है और शैली आत्मकथात्मक-सी प्रतीत होती है।


9. झूठा सच – यशपाल

    विभाजन के दर्द और सामाजिक विघटन को दर्शाता हुआ शक्तिशाली उपन्यास। इतिहास को इंसान की आँखों से देखने की किताब। वर्ष 1947 में भारत के विभाजन के दौरान हुए मानवीय दुःख, राजनीतिक संघर्ष, और सामाजिक विघटन को केंद्र में रखकर, यशपाल ने सिर्फ घटनाओं का वर्णन नहीं किया, लेकिन विभाजन के समय व्यक्तिगत पीड़ा, आशाएं, और त्रासदियां, भी दिखाई है। इतिहास केवल संख्याओं और तारीखों में नहीं, बल्कि इंसान की आँखों और भावनाओं में भी दर्ज होता है - यह बात इस उपन्यास का केंद्र है। 


10. तितली – जयशंकर प्रसाद

    जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित, वर्ष 1936 में प्रकाशित लघु उपन्यास तितली - कोमल भावनाओं और सामाजिक दबावों के बीच उलझी एक स्त्री की कथा है। भाषा थोड़ी साहित्यिक, पर भाव सीधे दिल तक पहुँचते हैं। प्रसाद ने इसमें स्त्री की संवेदनशीलता, प्रेम और समाज द्वारा लगाए गए बंधनों को बहुत ही सजीव और गहराई से प्रस्तुत किया है। उपन्यास की नायिका तितली अपने मन और समाज की अपेक्षाओं के बीच उलझी रहती है। यह उपन्यास उस समय की सामाजिक संरचना और स्त्री जीवन की यथार्थता भी दिखाता है।


|| अस्तु ||


प्रिय पाठक !

आपकी पसंदीदा हिंदी किताब कौन-सी है? कमेंट में ज़रूर बताइए।
और अगर यह सूची पसंद आई, तो शेयर करें ताकि और लोग भी पढ़ना शुरू करें।

Dilayari पढ़ते रहिए, नए पत्र सीधे आपके Inbox में आएंगे:

मेरे लिखे भावनात्मक ई-बुक्स पढ़ना चाहें तो यहाँ देखिए:
और Instagram पर जुड़िए उन पलों से जो पोस्ट में नहीं आते:

आपसे साझा करने को बहुत कुछ है…!!!

मेरी अन्य पुस्तक समीक्षाएँ

अगर आपको किताबों के साथ मेरा संवाद पढ़ना अच्छा लगता है,
तो ये कुछ और पुस्तक समीक्षाएँ भी पढ़िए—
जहाँ कहानी के साथ-साथ मेरा मन भी बोलता है:


~♠~

Post a Comment

0Comments
Post a Comment (0)