द हिडन हिन्दू की कहानी किस बारे में है?
द हिडन हिन्दू - भाग 1
प्रियम्वदा !
कुछ दिनों पूर्व एक व्हाट्सएप्प ग्रुप में किसी के द्वारा पूछा गया, कि 'रहस्य और रोमांच के लिए कोई उपन्यास हो तो बताइए।' कुछ उपन्यासों के नाम मुझे भी मिले, और एक नाम मैंने भी बताया, वह था द हिडन हिन्दू..! लेखक अक्षत गुप्ता द्वारा अंग्रेजी में लिखित यह श्रृंखला उपन्यास है। और प्रभात प्रकाशन द्वारा प्रकाशित किया गया है। मैंने हिंदी अनुवाद ही पढा है। अंग्रेजी सीखने का आलस ही मुख्य कारण रहा है। वैसे भी कामचलाऊ अंग्रेजी मुझे आती है, और उतने में मैं संतुष्ट हूँ। जहां अंग्रेजी का काम पड़ता है, वहां अब AI या ट्रांसलेटर काम करते ही है।
मुझे हमेशा से ऐतिहासिक उपन्यासों ने ज्यादा आकर्षित किया है। पूर्णतः ऐतिहासिक हो, या न हो, पर पात्र भी यदि इतिहास से जुड़े रहते है, तो वे उपन्यास मेरे लिए प्यासे का पानी है। मैंने मातृभाषा गुजराती में लगभग ऐतिहासिक नवलकथाएँ पढ़ ली है। धूमकेतु, कनैयालाल मुंशी के तो 7 से 8 पुस्तकों की श्रृंखलाएं सतत पढ़ी थीं। मेरे रस का विषय रहा है। सोलंकी वंश पर, परशुराम पर, चुडासमा वंश पर.. यह उपन्यासों की श्रृंखलाएं तो मेरा डिप्लोमा खा चुकी थी..! पर अफसोस नहीं होता। हमारी जिजीविषा रस पर ही निर्भर है। हमें कुछ पसंद है तो हम कुछ प्रयत्नशील होतें है। एक बात याद आ गयी, धूमकेतु अर्थात गौरीशंकर जोशी और कनैयालाल मुंशी, दोनों ने ही सोलंकी काल पर ऐतिहासिक उपन्यास लिखे है। और सबसे बड़ा भेद यही था, कि कुछ पात्र अलग जरूर थे, लेकिन कनैयालाल मुंशी जी अपने पात्र द्वारा प्रियतमा के माथे पर एक चुम्बन जरूर से दिलवाते थे..!
उपन्यास में इतिहास और माइथोलॉजी का मिश्रण
खैर, अभी तो मैंने यह द हिडन हिन्दू का प्रथम भाग ही पढा है, और मुझे इतना ज्यादा रोचक लगा है, कि मेरा मन नही कर रहा है यह समीक्षा लिख लेने का। मन तो है कि अभी, रात्रि के ग्यारह बजे ही दूसरा भाग भी पढ़ने बैठ जाऊं। पर फिर मन को इस लिए भी यहां प्रवृत्त कर रहा हूँ, क्योंकि यह भी उतना ही जरूरी है। मेरे साथ वह भी गंभीर समस्या है, कि जैसे जैसे मैं कहानी में आगे बढ़ते जाता हूँ, मैं कहानी का आरंभ भूलते जाता हूँ। अगर अभी ही यह समीक्षा न लिखी, तो बाद में तो कहां याद आएगा कि बात शुरू कहाँ हुई थी..!
अक्षत गुप्ता के विषय मे मैं कुछ नही जानता हूँ, न ही अभी गूगल करने की इच्छा है। लेखक की कृति से प्रभावित होना चाहिए। व्यक्तित्व तो आजकल CJI का भी कैसा हो किसे पता? कॉकरोच कह दिए साहब सबको.. उन्होंने जिस भी परिस्थिति में बोला हो, लेकिन लोग भी निकल पड़े है, कॉकरोच जनता पार्टी बना दी गयी सोशल मीडिया पर, मेनिफेस्टो भी..! कोई गले मे कॉकरोच की तस्वीर टांगे खुली गटरें दिखा रहा है, तो कोई ai जेनरेटेड वीडियोस बना रहा है। जजसाहब की कथनी को साबित करने में लगा हुआ है देश का युवा। जजसाहब ने कहा था, 'युवा सोशल मीडिया चलाता है..' एक दृष्टिकोण से देखें तो सोशल मीडिया से क्या देश उन्नति की राह पाएगा? या फिर संशोधन से..
अरे, द हिडन हिन्दू से कहाँ मैं तिलचट्टे की बात लेकर बैठ गया। कहानी की शुरआत होती है वर्ष 2041 से। और फिर कहानी 2020 में चलती है। और इस भाग के अंत मे वापिस 2041 में एक रहस्य का घटस्फोट होता है। मेरे लिए तो यह उपन्यास एक खदान है.. समर कितने सारे पात्र आए.. सुभाषचंद्र बोस, सुषेण, चाणक्य, सुश्रुत, धन्वंतरि, परशुराम, अश्वत्थामा.. इन सब पात्रों का या तो इतिहास, या तो इस कहानी के साथ सीधा संबंध है.. लेखक ने बहुत सारे पात्रों, बहुत सारी छोटी छोटी कहानियों से, यह उपन्यास लिखा है। शायद इसी लिए तीन भागों में बांटना पड़ा होगा। लगभग 111 पन्ने का प्रथम भाग है। आराम से एक बैठकी में पढ़ा जा सकता है।
भाषा और अनुवाद कैसा लगा?
बात करूं भाषा की, तो यह सीधा-सीधा अनुवाद पढ़ रहे है वैसा लगता है। जैसे किसी ने बिना महेनत किए अंग्रेजी से हिंदी में शब्दसः छाप दिया हो। कईं बार इस कारण से कहानी नीरस लगने लगती है। कुछ जगहों पर आवश्यक्ता अनुसार भरपूर शुद्ध हिंदी में संवाद लिखने की कोशिश की है, लेकिन एक शब्द फ़ारसी/उर्दू का डालकर सारा ध्यान वहीं खींच लिया जाता है। जब सुश्रुत और धन्वंतरि बात करते हैं, वहां 'दावत' शब्द बड़ा ही अजीब लगता है।
ओम शास्त्री और अमरता का रहस्य
कहानी के इस भाग के अंत तक आते-आते एक बढ़िया सा रहस्य-घटस्फोट किया जाता है। कहानी का नायक ओम शास्त्री है, और वह एक अमरता को प्राप्त किया हुआ व्यक्ति है। पृथ्वी पर कईं महत्वाकांक्षाओं में से एक अमरता है। इस कहानी में अमरता को हताश करने वाली वस्तु दिखाने का भरसक प्रयास किया है लेखक ने। हालांकि अमरता के साथ कोई ऐशो-आराम नहीं मिलते है, मिलता है एक एकांत। सदैव के लिए। यह बात सत्य है, फिर भी बहुतों की कामना होगी अमरता प्राप्त करने की।
क्या द हिडन हिन्दू पढ़ना चाहिए?
अक्षत गुप्ता के उपन्यास द हिडन हिन्दू में प्राचीन ग्रंथो, प्राचीन सभ्यताएं, और प्राचीन संस्कारों से प्राप्त मानवता को सर्वोपरि रखा गया है। यह उपन्यास उन लोगों को ख़ास पढ़ना चाहिए जिन्हे रोमांच, रहस्य, और कल्पनाओं का समंदर पसंद हो। थोड़ी बहुत इतिहास से जुड़े, और अब जिसे माइथोलॉजी कहते है, वहां के पात्रों का परिचय भी जानने को मिलेगा। तथा अध्यतन टेक्नोलॉजी का संगम भी।
चलो फिर, अब मुझे दूसरा भाग पढ़ना है।
शुभरात्रि।
२०/०५/२०२६
|| अस्तु ||
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