लड़कपन, झूठ और नौकरी के बीच उलझा मन | प्रियम्वदा

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लड़कपन, झूठ और नौकरी के बीच उलझा मन


दोस्तों की यादों, नौकरी और अधूरी यात्राओं के बीच उलझे मन को दर्शाती कार्टून चित्रकला

विचारशून्य मन और लिखने की दुविधा

    प्रियम्वदा !

    आज क्या लिखा जाए.. आज तो फिर से दिमाग विचारशून्य होता जा रहा है.. मैं वैसे भी कौनसा गहराई से परिपूर्ण लिखता हूँ, जो मेरे भी शब्दों का अकाल पड़ जाता है? समस्या ही है यह भी। समस्या जितनी कठिन होती है न, उतना ही ज्यादा मजा उसका हल खोजने में आता है। धारणाएं भी कितनी बार गलत साबित हो जाती है.. और मेरे साथ तो हमेशा से होता रहा है। जो चाहा, वह पाया नहीं, जो अनचाहा था, उसे बोझा माना। बस यही समस्या की जड़ है, मन की इच्छा की अनापूर्ति। 


गजा से मुलाकात और पुरानी तिकड़ी की यादें

    परसो रात गजा आया था, थोड़ी देर बैठा, और ढेरों मुद्दों पर थोड़ा थोड़ा चञ्चुपात कर गया। आंदोलन से लेकर स्थानिक व्यवस्था पर। नीट से लेकर नावेल तक। मुंह में पड़े छालों से लेकर किसी पुराने दोस्त की चुगली तक। गजा भी लगभग महीनेभर बाद मिला। पत्ता तो दिखना दुर्लभ हो चूका है। अभी उससे बात हुई तो पता चला, देशनोक जा रहा है। गजा कल किसी पुस्तकागार में था, और मैंने उससे एक पुस्तक मंगवाई जो मिली ही नहीं। 


बड़े होने के बाद लड़कपन क्यों याद आता है?

    कितने दिन बीत गए है, हमारी तिकड़ी इकट्ठी बैठी नहीं। पिछली बार गजे की पार्टी में खूब गुलछर्रे उड़ाए थे। रात के दो बजे घर से आते फ़ोन पर बहाने पर बहाने मारने की नौबत आन पड़ी थी। उस पार्टी के अनुसन्धान में अगर उल्लेख करूँ, तो गजा बेहद है, मैं नपातुला हूँ, और पत्ता नौटंकी है। बात लड़कपन की है.. एक उम्र हो जाने पर, बहुत ज्यादा बंधन में पड़ें हो वैसा अनुभव होने लगता है। जैसे जैसे बड़े होते जाते है, हम पर मर्यादाएं थोपी जाने लगती है, शोभा-अशोभा की। लोग कहते है न, ऊंट जितना बड़ा हो गया, पर अक्कल तब भी न आयी। 


झूठ, आबरू और सामाजिक मर्यादाएं

    कभी मन करता है, फिर से लड़कपन को अपनाने की। उस दिन बिना तय किए लड़कपन का मौका मिला, और हम तीनों ही टूट पड़े थे। घर से झूठ बोलना, बहाने मारना, और अपनी मनचाही करना। घर पर बोला गया, हम किसी सामाजिक कार्य के लिए जा रहे है। और पहुँच गए एक फार्म हाउस पर। रात के 1 बजे तक तो चूल्हा पर चढ़ी हांडी उतरी ही न थी। क्योंकि हर कोई सुरा की साधना कर रहा था। बड़े खाने के साथ समस्या यह रहती ही है, देर बहुत लगती है। लगभग तीनों के ही घर से फ़ोन आ रहे थे, क्योंकि दस बजे का बोलकर भी कोई बारह बजे तक घर न लौटा था। 


नौकरी और अधूरी रह गई यात्राएं

    कोई कार पंक्चर का बहाना मार रहा था, कोई ढाबे पर खाने बैठने का बहाना मार रहा था, और कोई तो फोन ही न उठा रहा था। झूठ क्यों बोलतें हैं हम? खाना-पीना कोई गलत काम नहीं होता। लेकिन वही बात है न, हमें शोभा का ख्याल रखना पड़ता है। समाज में हमारे पास अपनी एक आबरू होती है। आबरू अपने आप में बड़ा विचित्र चरित्र है। छोटी छोटी बातों में रूठकर कहीं चली जाती है, और आदमी बेआबरू रह जाता है। बस बेआबरू होने से बचने के लिए आदमी कईं तरह के झूठ बोल सकता है। कईं बार बस मर्यादा को बनाए रखने के लिए भी झूठ बोलै जाते है। 


आखिर हम किसके लिए लिखते हैं?

    अरे आज एक पोस्ट पब्लिश करनी थी, लेकिन नहीं कर पाया। यही तो मुद्दा था, कोई भी ऐसी बात नहीं बस रही मन में जिसे यहाँ लिखूं। देखो, जैसे ही यह बात लिखी मैंने, मन में एक विरोधी विचार पनपा, कि क्यों लिखना है, किसके लिए? नहीं लिखोगे तो क्या हो जाएगा? अपने आप को बड़ा लेखक मानने लगे हो? हीनभावना से तर हुए जा रहा हूँ। मन कर रहा है कहीं निकल पडूँ घूमने। लेकिन मेरे पास भी दूर के कुछ लक्ष्य है, जिन्हे हांसिल करने के लिए मुझे मेरे वर्तमान मन की नकेल कस्ते रहना पड़ता है। 


तुलना का बोझ और घूमने की इच्छा

    घूमने जाना भी अगर कठिन जान पड़ता है, मतलब मेरे पास घूमने जाने से अधिक जरूरी कुछ करने को है। कुछ इतना जरुरी, जो मन की प्रसन्नता को भी गौण मानता है। लोग नौकरी कहकर सम्बोधित करते है उसे। कितने ही प्रवासों की एक सूची मेरे ड्राफ्ट्स में पड़ी हुई है, जिन्हे चिढ़ाती है मेरी नौकरी, और उसकी सहेली - छुट्टियां। एक और चीज भी तो है, तुलना। घूमने में खर्च होने वाले पैसों से और क्या-क्या चीजें खरीदी जा सकती थी, इस बात की तुलना। यह तुलना भी एक हद तक होती है, उसके बाद इसकी कोई कीमत नहीं रह जाती है। जब लगता है, कि बस अब हो गया, तब निकल पड़ता हूँ, कहीं भी.. किसी भी दिशा में.. किसी भी गंतव्य स्थान के बिना भी.. बस एक दिशा में.. 


    शुभरात्रि,

    २०/०६/२०२६

|| अस्तु || 


प्रिय पाठक,

क्या आपको भी कभी ऐसा लगता है कि बड़े होने के बाद लड़कपन कहीं पीछे छूट गया है? दोस्तों, अधूरी यात्राओं और जिम्मेदारियों के बीच आपका मन किस ओर भागता है? अपने विचार टिप्पणियों में अवश्य साझा करें।


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