जयंती रंगनाथन का उपन्यास शुगर डैडी || समीक्षा : शक और सस्पेंस

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जयंती रंगनाथन का ‘शुगर डैडी’ : एक ऐसा मर्डर मिस्ट्री उपन्यास जो हर किसी पर शक करवाता है

    प्रियम्वदा !

    मुझे लग रहा है, मैं बहुत जल्दी में पुस्तकें पढ़ रहा हूँ। पिछले कुछ दिनों में बहुत सारे उपन्यास पढ़ लिए है मैंने। और आश्चर्य इस बात का है, कि अभी तक मन भरा भी नहीं है। आज जो किताब पढ़कर पूरी की है, वह एक ऐसी किताब थी, जिसके हर पन्ने पर शक की सुई इधर से उधर भागती है। कुछ पन्ने शक करना सीखाते है। 


शुगर डैडी उपन्यास समीक्षा हिंदी | जयंती रंगनाथन मर्डर मिस्ट्री थ्रिलर

पुस्तक परिचय

  • पुस्तक : शुगर डैडी
  • लेखक : जयंती रंगनाथन
  • श्रेणी : मर्डर मिस्ट्री / थ्रिलर
  • प्रकाशक : हिन्द युग्म


उपन्यास शुगर डैडी की कहानी किस बारे में हैं?

    दिल्ली का एक बिजनेसमैन श्याम राजगीर का कालपी नामक एक हिल स्टेशन पर क़त्ल हुआ। और सुलोचना नामक पुलिसकर्मी अब इस हत्या की गुत्थी सुलझा ने प्रयास कर रही है। आठवे दिन पर इस केस का आरोपित मिला। इन आठ दिनों में बहुत सारी कहानियां बनी, बिगड़ी। बहुत सारी साजिशें हुई, बहुत सारी घटनाएं हुई। हतभागी श्याम के संपर्क में रहे वे तमाम लोग, इस कहानी को इतना पेचीदा बना देते हैं, कि इंस्पेक्टर सुलोचना के लिए यह गुत्थी और उलझती जाती है। 


    इस कहानी की मुख्य नायिका एक नवयुवती है, निति नाम है उसका। उसे पत्रकार बनना है। और वह अपनी पत्रकारिता को सुदृढ़ बनाने के लिए इस केस के समान्तर अपना अलग संशोधन चलाती है। बहुत सारे अन्य पात्र इस उपन्यास में आते है, अपने साथ अपनी अलग कहानी भी लाते है। 


    मर्डर के लिए एक मोटिव की जरुरत होती है, और इस कहानी के सभी पात्रों के पास अपना एक मोटिव था। यही कारण था, कि हर किसी पर संदेह जाता है। लेखिका ने अंत में एक घुमावदार मोड़ देकर कहानी को आरम्भ के पास लाकर खड़ा कर दिया। हाँ ! यह बात पर कोई संदेह नहीं है, कि इस उपन्यास को पढ़ते हुए पाठक खुद भी डिटेक्टिव की भूमिका में बंध जाता है। 


जयंती रंगनाथन की लेखन शैली

    जयंती रंगनाथन ने भाषा बिलकुल सरल रखी है, लेकिन गालियां भी कईं है। कुछ जगहों पर अभद्रता भी लग सकती है। लेकिन दूसरे दृष्टिकोण से देखते है, तो वहां वह गालियां, और अभद्रता उपयुक्त भी लगती है। मतलब जरूरत के अलावा अपशब्दों का उपयोग नहीं है। पर मैं फिर भी चाहता हूँ, कि कम से कम अपशब्दों का इस्तेमाल न ही किया जाए तो ज्यादा बेहतर रहता है। 


क्या शुगर डैडी का रहस्य पहले ही समझ आ जाता है?

    वैसे कहानी के पांचवे-छठे दिन से ही एक अंदाज़ तो आ ही जाता है, कि गुनहगार कौन है। मैंने तो एक ठीक-ठाक अंदाज़ लगा लिया था। और मैं सही भी रहा था। यह कहानी एक तरह की माइंडगेम है। अपने जासूसी व्यक्तित्व को उजागर कर सकती है। मैंने तो शुरुआत से ही सब पर शक की सुई रखी थी। लेकिन आधी कहानी पढ़ लेने के बाद शक असली गुनहगार पर बढ़ता गया था। पर मैं लिख नहीं सकता गुनहगार के बारे में, फिर वही रहस्योद्घाटन हो जाएगा। वैसे मेरे शक्की दिमाग ने तो उन पर भी शक कर लिया था, जिनका इस प्रसंग से ही कोई वास्ता न था। 


    इस कहानी में चुलबुली नायिका है। एक महत्वकांक्षी इंस्पेक्टर है। शंका करने योग्य ढेरों किरदार है। और एक विचित्र खलनायक भी। लेकिन दिलचस्प बात क्या है पता है? सब स्त्रियां है। स्त्रियों की दुनिया में आएं है वैसा लगता है। वो एकमात्र पुरुष श्याम बेचारा मर गया, बाकी इंस्पेक्टर स्त्री है, नायिका पत्रकार स्त्री है, खलनायक भी स्त्री ही है। इसके अलावा स्त्रियों की भरमार है। 


यह उपन्यास किन पाठकों को पसंद आएगा?

    जिन्हे रहस्य और शंकाशील स्वाभाव से अवगत होना हो, उनके लिए तो यह उपन्यास बड़ा ही रोचक रहेगा। क्राइम, थ्रिलर और सस्पेंस.. यह तीनों कूट कूट कर भरा है जयंती रंगनाथन ने अपने उपन्यास शुगर डैडी में। मुझे लगता है, हमेशा एक ही तरह के उपन्यास नहीं पढ़ने चाहिए। पठन में विविधता होनी चाहिए। पढ़ते हुए पढ़ने का अनुभव होना चाहिए। पढ़ते हुए किसी वाक्य पर अटकना, और उस वाक्य का अपने विचारों में विस्तारण करने से कहानी के साथ जुड़ने का आनंद आता है। 


क्या आज के उपन्यास छोटे होते जा रहे हैं?

    उपन्यास शुगर डैडी में निति का पात्र सबसे पसंदीदा रहा। उसमे एक उत्सुकता है, थोड़ी सी नटखट भी है। साहसी भी। थोड़ा हास्य भी उपजता है इस गंभीर उपन्यास में, जब निति की बात आती है, या संवाद आता है। वैसे मुझे एक ख्याल यह भी आ रहा था, कि यह जो मैं उपन्यास पर उपन्यास पढ़े जा रहा हूँ, मुझे शंका होती है, कि यह सारी कहानियां इतनी छोटी क्यों है.. लम्बे चौड़े उपन्यासों के बजाए बस दोसौ पन्नों के आसपास कहानी सिमट जाती है। या तो लेखकों की लेखनी दौसौ पन्नों के बाद साथ छोड़ देती है, या फिर पाठकवर्ग कमजोर हो रहा है। 


    सोचने का विषय है, क्या लेखक दुर्बल हो रहा है, या पाठक?


    शुभरात्रि,

    २७/०५/२०२६

|| अस्तु ||

प्रिय पाठक !

आपको कैसी लगी यह समीक्षा?

यदि आपको रहस्य, थ्रिलर और सस्पेंस से भरे उपन्यास पसंद हैं, तो ‘शुगर डैडी’ आपके लिए एक रोचक अनुभव हो सकता है।
और यदि आपने यह उपन्यास पढ़ लिया है, तो कमेंट में जरूर बताइए — आपको सबसे ज्यादा संदिग्ध कौन लगा था?


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