टिटहरी के अंडे, एल नीनो और बारिश की भविष्यवाणी | एक गुजराती मान्यता

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टिटहरी और बारिश की लोकमान्यता

    प्रियम्वदा !

    मान्यताओं का कोई तोड़ नहीं है। मान्यताएं बस कर्णोपकर्ण चलती रहती है। कुछ मान्यताएं भविष्य को सूचित करती है, कुछ वर्तमान को। एक मान्यता है, टिटहरी को लेकर। टिटहरी एक पक्षी है, जिसके बगुले जैसे लम्बे लेकिन पिले पैर होतें है। काला माथा, श्वेत काया, और चोंच से लेकर आँखों तक एक लाल पट्टी, तथा कथ्थई रंग के पंख। आमतौर पर खेतों में रहता है, और छोटे कीड़े-मकोड़े का भोजन करता है। घोंसला बनाने के बजाए वह खुली जगह पसंद करता है, और उसके अंडे चितकबरे होते है। 


दूसरी मंजिल की छत पर अंडों की रक्षा करती टिटहरी

क्या सचमुच ऊँचे अंडे अधिक बारिश का संकेत हैं?

    मेरे घर के बाजूवाले घर के दूसरे माले पर सीमेंट के पतरे लगे हुए है। चारो तरफ से किनारी है, और खुली जगह है। तो टिटहरी ने वहां अपने अंडे दिए। मुद्दा मान्यता का है, मान्यता ऐसी है, कि ऐसा माना जाता रहा है, कि टिटहरी जितने ऊँचे अंडे देगी, उतनी ज्यादा बारिश होगी। आमतौर पर खेतों में वह ऐसी ऊँची जगह पर अंडे देती है जहाँ से बाकि जमीन नीची होती है। लेकिन मैं अब परेशान हूँ इस टिटहरी ने दूसरे माले पर अंडे दिए थे.. तो क्या अब बाढ़ आएगी? (lol)


एल नीनो क्या है और यह मानसून को कैसे प्रभावित करता है?

    गुजरात में हर बार गर्मियों में यह खबर बनती ही बनती है, कि इस बार टिटहरी ने इतने ऊँचे अंडे दिए है। और लोग खुश भी होते है। बारिश सबको ही चाहिए। यह तो हुई मान्यता, अब विज्ञान के अनुसार यह साल सुपर एल नीनो असर से ग्रस्त है। एल नीनो एक प्राकृतिक और जटिल जलवायु घटना है। वह मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से काफी अधिक बढ़ा देती है। और इस कारण से वर्षा के बादल या तो अपना पथ भटक जातें है, या कमजोर हो जाते है। इस स्थिति में अकाल होतें है, अनावृष्टि। खरीफ फसलों की पैदावार घट जाती है। और कईं जगहों पर अतिवृष्टि भी होती है।


    तुम्हे क्या लगता है प्रियम्वदा, टिटहरी का अनुमान सही रहेगा या एल नीनो का?


टिटहरी के बच्चों की रक्षा का छोटा सा प्रयास

    सवेरे भाणीबा आए, "मामा, टिटोळी आयवी धाबे।" (छत पर टिटहरी आयी।) छत पर टिटहरी का एक बच्चा घूम रहा था, और उसकी माँ उसकी रक्षा करने तत्पर खड़ी थी। खुली छत पर टिटहरी का बच्चा किसी बिल्ली के लिए आसान शिकार बन सकता था। मैंने बड़ी मुश्किल से उस बच्चे को पकड़ा। और बाजूवाले के पतरे पर छोड़ दिया। हालाँकि यह प्रयास असफल रहा था। क्योंकि जब मैं तैयार होकर ऑफिस के लिए निकल रहा था, तब भाणीबा अपने छोटे क़दमों से भागते हुए फिर आए, "मामा ! ओली पासी आयवी, हारी गांडी से।" (मामा ! वो टिटहरी वापिस आ गयी। वो पागल है।) मैंने छत पर देखा, तो अबकी बार टिटहरी के चारों बच्चे इधर उधर भाग रहे थे। और दोनों बड़ी टिटहरी अपने बच्चों के आसपास रक्षात्मक घेरा बनाए घूमती थी। 


    दो दिनों तक यह टिटहरी काण्ड चला, आज सवेरे वे अपने सुरक्षा घेरे में से गायब थे। बिल्ली से बचाने के लिए मैंने उन चारों बच्चों को अपनी छत पर पड़े एक कार के टायर के बिच रखा था। और थोड़ा दाना-पानी भी डाला था। आज शायद वे इतने बड़े हो गए होंगे, तो बड़ी टिटहरी ने उन्हें कहीं ओर शिफ्ट कर दिया। 


नरसिंह मेहता के प्रभातिया में कर्म और भक्ति

    आज सवेरे एक विचार आया, कि हम माने गुजराती लोग काम को लेकर कितने जागरूक है.. काम अर्थात नौकरी-धंधा। भजनों के प्रकार में एक होता है 'प्रभातिया' - प्रभाती सवेरे गाया जाता है। सुप्रसिद्ध संत नरसिंह मेहता का प्रभाती है, "जाग ने जादवा, क्रष्ण (कृष्ण) गोवाळीया, तुझ विण धेन मां कोण जाशे.." कृष्ण को जगाने का प्रभाती है, कि 'हे यदुकुल के गोपालक, अब जाग जा, और गायों को चराने जा.. तेरे सिवा कौन जाएगा?' तात्पर्य, कि जगतनियंता को भी जगाकर कहा जा रहा है, कि काम करो.. 


    लेकिन यहीं नहीं, फिर उसी ईश्वर को जब मेहमान के रूप में आमंत्रित करते हैं, तो कहते हैं,

        काठियावाड़ मां कोक दि, तू भूलो पड भगवान,
        थाने मारो मेहमान, तने स्वर्ग भुलावू शामळा..!!

    अर्थात, एक बार तू भूल से भी हमारे प्रदेश में आ जा, और फिर हमारी मेहमानगति देख, तू स्वर्ग भी भूल जाएगा। इतनी श्रद्धा से कोई तब ही कह सकता है, जब उसे अपने पर, अपने ईश्वर पर पूरी आस्था और सम्पूर्ण समर्पण भाव हो। कोई भी प्रदेश का साहित्य पढ़कर ही उस प्रदेश को अच्छे से जाना जा सकता है। 


    शुभरात्रि।

     ३१/०५/२०२६

|| अस्तु || 


प्रिय पाठक,

आपके क्षेत्र में टिटहरी को लेकर कौन-सी मान्यताएँ प्रचलित हैं? क्या आपने भी कभी टिटहरी के अंडों और बारिश के बीच कोई संबंध देखा है? अपने अनुभव टिप्पणियों में अवश्य साझा करें।

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