बॉक्स क्रिकेट, Gen Z और नौकरी के बीच फँसी एक शाम | डायरी

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बॉक्स क्रिकेट खेलने का अचानक बना कार्यक्रम


बॉक्स क्रिकेट खेलते हुए थका हुआ व्यक्ति और Gen Z खिलाड़ियों की ऊर्जा

    बहुत दिन हो गए प्रियम्वदा ! तुम्हे कुछ भी लिखने को मिला नहीं। लिखने की वस्तु तो आज भी नहीं है मेरे पास, लेकिन अगस्त के चौथे दिन भी कुछ न लिखूंगा, तो यह ब्लॉग कैसे निभाउंगा? बातों का अकाल पड़ा है, जैसे उगने को आतुर फसलों को वर्षा का अकाल है। बारिश भी कितनी अजीब है.. जहाँ हो रही है, वहाँ सबकुछ ही जलमग्न कर दे रही है, और जहाँ नहीं हो रही, वहां आसमान से सूर्य की आग बरस रही है.. उगाने की आशा में धरती के पेट में पड़े बीज, क्या ऐसे ही व्यर्थ जाएंगे? क्या इसे प्राकृतिक भ्रूण हत्या कहा जा सकता है?


नौकरी ने फिर दिखा दी अपनी औकात

    कल रात अपनी सोसायटी के genz के साथ (उनके दबाव में आकर) बॉक्स क्रिकेट खेलने गया था। शहरों में अब खुले मैदानों के अभाव में, या फिर ज्यादा भागदौड़ से बचने की इच्छा के दबाव में, बॉक्स क्रिकेट का कल्चर जोर पकड़ रहा है। मेरे ही छोटे से शहर में न जाने कितने सारे बॉक्स क्रिकेट खुल चुके है। और सारे ही एडवांस बुकिंग पर बुक्ड भी रहते है। genz ग्रुप ने रविवार को ही बुकिंग कर ली थी। रात आठ बजे ऑफिस से निकल ही रहा था, कि नौकरी ने अपनी औकात दिखा दी। एक काम आ गया, जिसने आधा घंटा खा लिया। 


पेट्रोल, झूठ और पत्ते की सवारी

    ऊपर से मेरी 'बाद में' टालने वाली आदत, मोटरसाइकिल में पेट्रोल की किल्लत चीख-चीख कर कह रही थी, "अभी के अभी ही पीला साकी.." पेट्रोल पंप वाले ने टंकी के मुंहाने तक तर किया, तब जाकर मोटरसाइकिल ने अपनी ख़ुशी जाहिर की। पर उसकी इस ख़ुशी में सम्मिलित होने में पौने नौ यहीं बज गए थे। नौ बजे तो बॉक्स में पहुंचना था। घर पहुंचा, और खा-पीकर उठा, कुँवरुभा को झूठ में सना लिफाफा पकड़ाया, कि वापिस ऑफिस जा रहा हूँ, और निकला ही था कि बिल्ली के काटे रस्ते पर रुक जाते है लोग, वैसे ही रुकना पड़ा। पत्ते का फोन था, कि मुझे भी साथ ले चल।


    घर से दूकान, एक मावा मुँह में, एक जेब में, और सीधे पत्ते के घर के पीछे मोटरसाइकिल रोकी। सूखा पत्ता, टनाटन नए नक्कोर स्पोर्ट्स शूज पहनकर बहार ही खड़ा था। बैठ गया, और हम चल दिए, जीवन में पहली बार बॉक्स में, और कुल-मिलाकर भी छठी-सातवी बार क्रिकेट खेलने। मुझे क्रिकेट नापसंद है।


महानगरपालिका का विकास मॉडल

    पिछले वर्ष ही विवाहित होकर आयी नवविवाहिता जैसी हमारी महानगरपालिका का तो क्या ही कहना। शर्मीली है थोड़ी। हमेशा घूँघट डाले रहती है। घूंघट की आड़ से उसे रोड के गड्ढे नहीं दीखते। गुमसुम रहती है बेचारी, जो जो काम उसने हाथ में लिए, अभी भी अधूरे है। थोड़ी बहरी भी है, आवारा कुत्ते पकड़ने दौड़ती है, तो आवारा सांडों को तनिक भी परेशान नहीं करती। जो काम हाथ में लेती है, सिर्फ वही करती है। थोड़ी सी अनपढ़ भी लगती है मुझे, क्योंकि लोग बता रहे थे, उन्होंने ने ढेरों चिट्ठियां लिखी, लेकिन कभी प्रत्युत्तर समय पर नहीं आता। 


    अच्छे खासे रोड तोड़कर, गटर लाइन बिछा लेने के बाद ऊपर मिट्टी डालकर विकास साध लेती है हमारी महानगरपालिका। टूटे हुए रोड तो छह महीने, सालभर बाद टेंडर निकालेंगे तब बनेंगे। बारिश हो जाए उसमे महानगरपालिका क्या करेगी? वो तो प्राकृतिक प्रक्रिया है। टूटे हुए रोड में मिट्टी के कारण चिकनाहट भरे गड्ढे बन जाए, तो वह महानगरपालिका ने थोड़े बनाए है? वो तो बारिश जिम्मेदार है। 


    ऐसे ही रोड पर से मेरी मोटरसाइकिल का पिछ्ला पहिया दो-तीन बार स्किड हुआ, और पत्ता थरथराया। "कार ले लेता, खड़ी रखने के लिए खरीदी है क्या?"


    "हाँ ! यही बात मैं भी तुझे बोल सकता हूँ। मैं जब तुझे तेरे घर पर लेने आया, तब वहां भी एक कार खड़ी ही थी।"


    "मेरी तो चलती रहती है, तेरी तो पड़ी रहती है, इस लिए कह रहा हूँ।"


    "मुझे मत कह, तेरे बापु को बोल, विपक्षी आदमी है, धरना-वरना करवाओ कुछ। सत्ता पाने के लिए थोड़ा कर्तव्यनिष्ठ होने का दिखावा करना पड़ता है। और ग्रुप में देख तो लोकेशन कहाँ की है?"


बॉक्स क्रिकेट में मेरा प्रदर्शन

    पत्ते ने मैप में देखते हुए भी, दो-तीन गलत रास्तों के बाद मंजिल तक आखिरकार पहुंचा ही दिया। GENZ लड़के पुरजोश में खेल रहे थे। गजा फील्डिंग में था। पत्ता उसकी टीम में, और मैं दूसरी वाली में। मुझे वैसे भी कहाँ खेलना आता था, कईं सालों बाद तो हाथ में बैट ही पकड़ा था। दो-तीन बॉल के बाद गेंद बहुत ऊँची गयी, और ठीक मुझसे पांच हाथ की दूरी पर फील्डर ने कैच पकड़ लिया। अपन आउट। फील्डिंग में भी मेरा प्रदर्शन सामान्य से भी निम्न रहा। रेंगती हुई आती गेंद भी मुझसे डाइवर्जन लेकर पैरों को छूकर निकल जाती। 


Gen Z की ऊर्जा और मेरी साँसें

    प्रियम्वदा ! यह खेल भी आसान नहीं। भले ही बॉक्स में खेलना है, एक सिमित क्षेत्र के भीतर ही। पर थोड़ी बहुत भागदौड़ तो यहाँ भी हो ही जाती है। दूसरी पारी में GENZ के बहकावे में आकर चार-पांच रन दौड़ने पड़े। और फिर लेना पड़ा सेल्फ रिटायरमेंट। पसीने से बेहाल होकर, हाँफते हुए एक जगह बैठ गया। ऐसा लग रहा था, मानो प्राण बस निकलने को ही है। कईं दिनों, नहीं, महीनों बाद ऐसी भागदौड़ की थी। यही होना था। आधे घंटे बाद कुछ सामान्य स्थिति हुई। 


नौकरी के बाद शरीर क्यों जवाब देने लगता है?

    नौकरी पेशा में इतना व्यस्त हो जाने के बाद अब भागदौड़ नहीं रास आती। न मन को, न शरीर को भी। अगर हररोज कुछ न कुछ श्रम होता तो समझ आ सकता है, लेकिन कभी नहीं, और एक दिन अचानक उछलकूद करने से शरीर भी मानों विरोध प्रदर्शन पर उतर जाता है। कमजोरी महसूस होना, चक्कर आना, साँसें फूलना, और पसीने से तर हो जाना, मिनी हार्ट अटैक लगता है यह। हाँ ! बच तो गया मैं इस बार भी। नौ से ग्यारह का हमारा टाइम था, लेकिन लड़कों का मन नहीं भरा। तो ग्यारह बजे पास में ही एक और खाली बॉक्स में बुकिंग ले ली। बारह बजे तक भी थके नहीं थे यह। वाकई यह जनरेशन अलग तो है ही।


    वैसे यह बॉक्स क्रिकेट बहुत सही है। तीन घंटे का बिल किसी मल्टीप्लेक्स की फिल्म की टिकट से भी कम आया। शारीरिक श्रम भी हो गया। और मनोरंजन भी। टीमवर्क और खेलदिली जैसी भावनाएं, और स्क्रीनटाइम की कटौती बोनस में। खेलना चाहिए। खेल खेलते रहने चाहिए, जिसमे भागदौड़ हो। 

    शुभरात्रि,

    ०४/०८/२०२६

|| अस्तु ||

प्रिय पाठक,

अगर आपको भी कभी Gen Z के साथ अपनी उम्र और ऊर्जा का अंतर महसूस हुआ हो, तो अपना अनुभव कमेंट में ज़रूर साझा कीजिए। शायद आपकी कहानी भी किसी और की मुस्कान बन जाए।


Q1. बॉक्स क्रिकेट क्या होता है?

उत्तर: बॉक्स क्रिकेट सीमित क्षेत्र में नेट से घिरे मैदान पर खेला जाने वाला क्रिकेट है, जहाँ कम जगह में भी लोग आसानी से खेल सकते हैं।

Q2. बॉक्स क्रिकेट इतना लोकप्रिय क्यों हो रहा है?

उत्तर: शहरों में खुले मैदानों की कमी, समय की बचत और दोस्तों के साथ मनोरंजन के कारण बॉक्स क्रिकेट तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।

Q3. लंबे समय बाद अचानक खेल खेलने से क्या समस्या हो सकती है?

उत्तर: यदि शरीर नियमित शारीरिक गतिविधि का आदी न हो, तो अचानक अधिक दौड़ने या खेलने से साँस फूलना, अत्यधिक थकान, मांसपेशियों में दर्द और कमजोरी महसूस हो सकती है।

Q4. क्या नौकरीपेशा लोगों को नियमित व्यायाम करना चाहिए?

उत्तर: हाँ। लंबे समय तक बैठकर काम करने वाले लोगों के लिए नियमित पैदल चलना, हल्का व्यायाम या खेलकूद शरीर को सक्रिय बनाए रखने में मदद करता है।


📖 थोड़ी देर और ठहरो प्रिय पाठक,


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