सड़ चुके घी से कमाए 201 रुपये! हैदराबाद के कंजूस निज़ाम उस्मान अली का हैरान करने वाला किस्सा

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दीवान जरमनी दास की किताब 'महाराजा' से: निज़ाम उस्मान अली, दतिया का घी और मिस्टर रेड्डी की चालाकी


Illustration of Nizam Osman Ali Khan of Hyderabad in his royal court discussing rotten ghee tins with police officer Mr. Reddy.

दतिया से आए शुद्ध देशी घी के 12 दर्जन डिब्बे

    हैदराबाद के निज़ाम उस्मान अली और मध्य भारत की दतिया रियासत के महाराजा के बीच काफी गहरी दोस्ती थी। दतिया का शुद्ध देशी घी अपने बेहतरीन स्वाद के लिए दूर-दूर तक मशहूर था, इसलिए निज़ाम ने उनसे कुछ डिब्बे भेजने की गुजारिश की। अपने दोस्त की बात रखते हुए दतिया के महाराजा ने अपने राजमहल के खास स्टॉक से शुद्ध देशी घी से भरे 12 दर्जन डिब्बे हैदराबाद भिजवा दिए।


दो साल तक गोदाम में पड़ा रहा घी और सालार जंग की फटकार

    इतने सारे डिब्बे देखकर निज़ाम साहब बेहद खुश हुए। उन्होंने तुरंत हुक्म सुनाया कि इन्हें राजमहल के गोदाम में किसी सुरक्षित जगह पर संभालकर रखा जाए। हुक्म की तामील हुई और घी के वे डिब्बे दो साल तक वहीं पड़े-पड़े धूल खाते रहे। दो साल बाद घी पूरी तरह सड़ गया और गोदाम से बदबू आने लगी। बदबू इतनी तेज थी कि वहाँ तैनात अफसरों का ध्यान इस तरफ गया, लेकिन निज़ाम के सनकी मिजाज से सब इस कदर खौफजदा थे कि किसी भी अधिकारी या कर्मचारी की हिम्मत नहीं हुई कि यह बात उनके कानों तक पहुँचाए।

    आखिरकार हैदराबाद रियासत के प्रधानमंत्री नवाब सालार जंग ने हिम्मत जुटाई। वे बेहद बेबाक, निडर और ईमानदार शख्सियत के मालिक थे। उन्होंने निज़ाम से जाकर सड़ चुके घी के बारे में बात की। लेकिन निज़ाम को सच सुनना कहाँ गवारा था! उन्होंने सालार जंग को ही खरी-खोटी सुना दी और डांटकर अपने कमरे से बाहर निकाल दिया।


"इंसान नहीं खा सकते तो क्या, मंदिरों में बेच दो!"

    इसके फौरन बाद निज़ाम उस्मान अली ने हैदराबाद पुलिस स्टेशन के इंचार्ज मिस्टर रेड्डी को तलब किया। उन्होंने रेड्डी को हुक्म दिया कि वे शहर के तमाम मंदिरों के चक्कर लगाएं और इस घी को वहाँ बेच आएँ। जब रेड्डी ने दबे स्वर में कहा कि घी पूरी तरह सड़ चुका है, इंसानों के खाने लायक नहीं बचा है और इसे फेंक देना ही बेहतर होगा, तो निज़ाम का पारा चढ़ गया। उन्होंने रेड्डी को लताड़ते हुए कहा कि भले ही यह इंसानों के खाने लायक न हो, लेकिन मंदिरों में दीये जलाने और धार्मिक अनुष्ठानों में मूर्तियों के आगे चढ़ाने के काम तो आ ही सकता है!


मिस्टर रेड्डी की होशियारी : नाले में बहा डिब्बा और मिले 201 रुपये

    निज़ाम का जिद्दी और अड़ियल रवैया देखकर मिस्टर रेड्डी समझ गए कि बहस करने का कोई फायदा नहीं है। उन्होंने चुपचाप सिर झुकाया और कहा कि हुक्म का पालन होगा। महल के मुख्य दरवाजे से बाहर निकलते ही रेड्डी ने बिना देर किए घी के वे सारे डिब्बे नाले में फेंकवा दिए।


करोड़ों के मालिक निज़ाम का 201 रुपये का खाता!

    कुछ घंटों बाद मिस्टर रेड्डी चेहरे पर बड़ी सी मुस्कान लिए निज़ाम के सामने वापस हाजिर हुए। उन्होंने बड़े फख्र से बताया कि घी मंदिरों में बिक गया है और उससे 201 रुपये मिले हैं। यह सुनकर निज़ाम उस्मान अली खुशी से फूले न समाए। उन्होंने उस पुलिस अफसर की इस 'जांबाजी' की जमकर तारीफ की और वे 201 रुपये सीधे अपने निजी बैंक खाते में जमा करवा दिए—जिस खाते में पहले से ही करोड़ों रुपये जमा थे!

    इतना ही नहीं, इस 'महान सेवा' के इनाम के तौर पर मिस्टर रेड्डी को फौरन तरक्की देकर एक बड़े पद पर तैनात कर दिया गया।



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