गुनाहों का देवता : किताब समीक्षा और लेखक जानकारी || Book Review of Gunaho ka Devta by Dharamveer Bharti ||
November 18, 2024
प्रियंवदा! भूमिका इतनी कठिन क्यों होती है? तुम्हे क्या लगता है प्रियंवदा, भूमिका बांधनी इतनी कठिन क्यो होती है? जबक…
DILAWARSINH
November 18, 2024
प्रियंवदा! भूमिका इतनी कठिन क्यों होती है? तुम्हे क्या लगता है प्रियंवदा, भूमिका बांधनी इतनी कठिन क्यो होती है? जबक…
DILAWARSINH
November 17, 2024
"मैं व्यस्त हूं: उलझनों, बलिदान और आत्मसंघर्ष की डायरी" व्यस्तताएं वास्तव में घेरती है, कभी तो हम चाहे तब…
DILAWARSINH
November 16, 2024
सकारात्मकता और नकारात्मकता का द्वंद्व प्रियंवदा ! कुछ लोग इतने सकारात्मक कैसे रह सकते है? मैं जब कुछ पढता हूँ तो स…
DILAWARSINH
November 15, 2024
आभा या प्रभाव? कौन किस पर भारी? आभा (AURA) सचमे होती है क्या? वैसे मुझे स्वानुभव से समझ नहीं आया, पर इतना जरूर जान…
DILAWARSINH
November 14, 2024
प्रियंवदा ! निराशा से मैत्री, और आशा की चुभन प्रियंवदा ! हमारी कुछ पूर्वधारणाए भंग होती है न, तब उत्पन्न होता भाव …
DILAWARSINH
November 13, 2024
बेमन से लिखी डायरी: क्या मन की बात सुनना ज़रूरी है? आज बिलकुल बेमन से लिख रहा हूँ प्रियंवदा ! क्योंकि मन जो चाहता …
DILAWARSINH
November 12, 2024
कविता या कवि – मनोस्थिति का भ्रम वो चाकू और खरबूजे वाली बात है प्रियंवदा..! कटता खरबूजा ही है, खरबूजा रसपूर्ण है, …
✦ मेरी पहली Kindle ईबुक
31 दिनों की डायरी, 31 भावनात्मक मुलाक़ातें। यह किताब उन अनकहे एहसासों की आवाज़ है, जो अक्सर शब्दों तक पहुँच ही नहीं पाते।
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