कट्टर भक्ति, ओवरवॉटरिंग और दिलबाग
बॉर्डर 2 : जब पुरानी जंग का जादू लौटकर नहीं आया
प्रियम्वदा !
अभी अभी बॉर्डर 2 देखी। सच बताऊँ तो वह पहले वाला मजा नहीं आया। पहले वाली बॉर्डर बड़ी शानदार मूवी थी। इस में वैसे आर्मी, एयरफोर्स और नेवी तीनों की लड़ाइयां दिखाई है, इस लिए शायद थोड़ी अटपटी लगी। कहानी भी ठीकठाक है। और काफी सारे सीन्स वही पुरानी बॉर्डर से मिलते जुलते लगे। हालाँकि युद्ध की मूवी में और क्या ही नयापन लाया जा सकता है? बस फाइटिंग बदली जा सकती है। खेर, सनी देओल की उम्र अब फिल्मों में दिखाई पड़ती है।
नींद, गर्मियां और पंखे की लगातार चलती प्रार्थना
इन दो चार दिनों में सबसे ज्यादा यूट्यूब मैंने चलाया है, और विषय था गार्डनिंग। पता नहीं कौनसा कीड़ा काटते रहता है मुझे समय समय पर। फ़िलहाल सर्दियाँ ख़त्म होने लगी है। और मुझे इस बात का अंदाज़ा अपनी नींद पर से आता है। गर्मियां मुझसे बिलकुल भी सहन नहीं होती। कल रात को नींद ही नहीं आ रही थी। लगभग डेढ़ बजे तक टाइमपास करता बैड पर पड़ा रहा था। नींद न आये उसके कईं कारण होतें है, लेकिन मेरी नींद उड़ने का एक मात्र कारण था गर्मियां। वैसे भी रातभर पंखा चालू ही रहता है।
समंदर में कूदने के बजाय किनारे बैठने का दर्शन
देखो एक तो होता है, किसी भी विषय में स्नातक होना, या स्नातकोत्तर होना। लेकिन मैं हमेशा से समंदर में कूदने के बजाए किनारे पर बैठकर पैर भिगोना ही पसंद करता हूँ। हाँ समंदर में कूद जाने के दो परिणाम होते है, तैर गए तो बच गए, डूब गए तो मर गए। लेकिन किनारे पर बैठकर बस हिलोरे मारते समंदर का आनंद लेना भी अपने आप में एक मजेदार प्रक्रिया है। क्या हुआ अगर समंदर के भीतर का मोती नहीं निकाल पाए.. किनारे पर बैठकर सूर्य की किरणों को परावर्तित होते देखना भी क्या कम लाजवाब है?
दिलबाग की शुरुआत : मधुमालती, गेंदा और नई धार्मिकता
तो उसी हिसाब से.. मैंने अपने दिलबाग में सबसे पहले मधुमालती, गेंदा लाकर बसाया..! धीरे धीरे स्नेक प्लांट, जेड प्लांट, क्रोटन, लकी बम्बू, यूफोर्बिया मिली, गुड़हल, टेकोमा, देशी गुलाब, मनी प्लांट, सदाबहार, मेक्सिकन मिंट.. जैसे कईं सारे पौधे लगा दिए। अब नया धार्मिक ज्यादा भक्ति करता है, उसी हिसाब से मैं भी कुछ ज्यादा ही देखभाल करने लगा। देखभाल से मेरा तात्पर्य सिर्फ पानी देना। हररोज पानी देना ही तो गार्डनिंग होती है। नई भक्ति का दिखावा भी आसपास के घरो में दिखने लगा। मुझे देखते देखते आसपड़ोस के लोग भी अपनी छतों पर गमलों की कतार बांधने लगे।
ओवरवॉटरिंग : जब ज़्यादा भक्ति जानलेवा हो जाए
हाल यह हुआ.. कि लगभग सारे ही पौधे ओवर वाटरिंग के चलते बस मृतप्राय हो चुके है। मैंने एक विडिओ देखा, उसमे बताया गया, कि अगर आपने स्नेक प्लांट मार दिया है, मतलब आप बहुत ज्यादा केयरिंग कर रहे हो अपने पौधों की। बात सच भी है। स्नेक प्लांट को 7-8 दिन में एक बार पानी देना होता है। वह एक ऐसा पौधा है, जिसे बाग़ में लगाने के बाद पंद्रह दिन में एकाध बार याद करना चाहिए। उसे कोई भी ख्याल-खबर की जरुरत नहीं होती। और वह छाँव में ज्यादा अच्छे से खिलता है। अब मुझे क्या पता.. यह भक्ति का कौनसा प्रकार है.. मैने तो बड़े से गमले में उसे लगाया। हर दिन पानी दिया.. थोड़े थोड़े दिनों में dap खाद देता गया.. आज छह महीने हो गए उसे.. जितना लाया था, उतना ही है आज भी.. बल्कि एक पत्ती कम जरूर हो गयी उसकी।
गेंदा मार चूका हूँ एक, और एक मधुमालती भी। मधुमालती में छोटी छोटी कोंपले दिख तो रही है मुझे। लेकिन पता नहीं, सूखी डाली पर वे कोंपले ठीक से खिलेगी भी या..? दूसरा हाइब्रिड गेंदा ले आया हूँ। उसे वही पुराने गेंदे वाले गमले में बिठा दिया। और दूसरे दिन देखा। वो देशी गुलाब गुज़र गया.. काफी सारे वीडिओज़ देखे.. वे लोग बता रहे थे, उसमे फूल आते ही उसे तोड़ लेना चाहिए। अब अपने को क्या पता.. यह भक्ति का कौनसा प्रकार है.. अपन तो नए नए धार्मिक हुए है भाई..!
लकी बम्बू की पीली पत्तियां और सर्दियों की गलती
खेर, बात करता हूँ लकी बम्बू की.. यह भी लाया तब क्या शानदार पौधा था..! एकदम हरे रंग का.. और आज.. इसकी सारी पत्तियां पिली पड़ चुकी है। कारण.. बस यही.. ओवर वाटरिंग। प्लास्टिक के गमले, ऊपर से ठण्ड का मौसम। गमलों के भीतर का पानी वेपोरेट हुआ नहीं। मिट्टी दलदली हो गयी। बस.. वह भी गुज़र जाने के कगार पर है। अब इतने सारे पौधों की मौत का एक मात्र कारण तो यही है, मेरी नई नई धार्मिकता। बहुत ज्यादा भक्ति कर लेने का, और बहुत जल्दी परिणाम को साधने की इच्छा.. यह दूसरों की मृत्यु का कारण बनता है।
कट्टरपंथ की ओर बढ़ता एक धार्मिक
अब मेरा बाकी था बस कट्टरपंथी बनना। और मैं इस दिशा में भी आगे बढ़ने लगा। मैं एक के बाद एक.. नए नए पौधे लाता ही जा रहा हूँ। अपने सोलर पेनल्स के निचे, आज करीब दस बारह पौधे तो हो ही चुके है। जहाँ तुलसी के सिवा, और घर के बाहर कनेर और बिल्वपत्र के सिवा कुछ भी नहीं था.. वहां यह दस-बारह गमले मेरे कट्टरपंथ का प्रतिक बन गए। मैं अपने दिलबाग को बढ़िया बनाने के चक्कर में, diy करने के चक्कर में.. कट्टरपंथ की हदें पार करने लगा। पानी के वे बीस लिटरिये कैन को काटकर एक अच्छा गमला तैयार हो जाता है। पचास रूपये मात्र में एक बोरा भर मिट्टी मिल जाती है। हो गयी बागवानी शुरू। सदाबहार तो हर घर में होता ही है। कांटछांट करो.. पौधा बड़ा करो..!
DIY गमले, सोलर पैनल और छत पर उगता जुनून
खेर, अब इस कट्टरपंथ में और आगे बढ़ाना बाकी था मेरा.. diy की तीक्ष्ण तपस्या मैं कर रहा हूँ। बैठने के लिए कुछ सीटिंग एरिया होना चाहिए न.. तो बस.. ऑफिस पर पड़े दो पुराने कार के टायर उठा लाया। बहुत जल्द उन्हें रंगीन कर दूंगा। आड़े टायर पर खटिया की तरह रस्सी से भर लेने से बैठने का जुगाड़ भी बन जाएगा। है न.. बस मेरी इस तपस्या को कोई इंद्र भंग न कर पाए... क्योंकि मेनका, रंभा, उर्वशी की मुझे फ़िक्र नहीं।
अब यहाँ तक कट्टरपंथ में कमी रह गयी थी मेरी। तो मैंने अपनी ऑफिस पर पानी की डेलिवेरी करते व्यक्ति से कह भी दिया.. "तेरे पास पुराने टूटे कैन पड़े हो तो मुझे दे जाना.." और अगले ने भी बिनशर्त हामी भरी है। वैसे वह भी कौनसा अमरीका है, जिसे ट्रेड डील चाहिए। तो अब उन नए गमलों के लिए मैंने यूट्यूब पर वीडियोस देख-देखकर दस और पौधे सेलेक्ट कर लिए है, जिन्हे मैं अपने इस दिलबाग में यह सोचकर लगाऊंगा.. कि वे मेरे दिलबाग में बिना कोई खेर-खबर से बस पड़े रहे, विकसित होते रहे, और दिलबाग को बस बाग़ भी बना दे तो बहेतर होगा।
भूखे पेट भजन न होए : श्रम, पैसा और साफ़ हाथ
चलो फिर.. अब थोड़ा काम भी कर लू.. क्योंकि किसी ज्ञानी ने ही कहा होगा। 'भूखे पेट भजन न होए..' और पेट को भूखा न रखने के लिए पैसे चाहिए। और पैसे तो कमाने पड़ते है। क्योंकि मैं दिन में दसियों बार हाथ धोकर मेल इकठ्ठा नहीं होने देता। वरना सुना तो यह भी है, कि पैसे हाथों का मेल है। लेकिन गंदे हाथों से फिर खाना कैसे खाऊ? खाना नहीं खाऊंगा, तो भूखे रहना होगा। और फिर वही बात.. भूखे पेट भजन न होए..!
शुभरात्रि।
०६/०२/२०२६
|| अस्तु ||
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