आने वाले कल को एक विनंती पत्र
प्रिय आने वाले कल..!
तुम तो आज हो गए, बीते कल जब लिखने बैठा था, तो तुम आने वाले कल थे.. इतनी जल्दी बदल गए तुम? जुबान के कच्चे हो यार तुम तो.. अब मैं तुम्हे ही नहीं, तुमसे भी आगे वाले कल को लिखूंगा। तुम्हारा क्या भरोसा, तुम फिर बदल जाओ?
आज, कल और मेरा अस्तित्व
मैं सोच रहा था, तुम कितने कमजोर हो गए हो? तुम निर्भर हो मेरे आज पर.. तुम्हारा तो अस्तित्व ही मेरे आज पर टिका हुआ है। होंगे तुम भविष्य के.. लेकिन हो तो कल्पना ही। मेरे आज के वर्तमान से तो तुम दोनों तरफ हो.. तुम बीता कल भी हो, और आने वाला कल भी। तुम्हारे पास क्या है, क्या रहेगा, वह मैं आज तय करता हूँ। लेकिन मेरा आज भी तो कमजोर ही है.. मेरे आज में उतना संघर्ष है, जितना मेरे कल में था। शायद उससे अधिक ही है। पर फिर भी अगर मैं कामना करता हूँ, तो मैं चाहता हूँ, तुम मेरे आरामदायक रहो।
Overthinking के दो दृष्टिकोण
मैं समझता हूँ, मेरे आज के प्रयत्नों का परिणाम तुम्हारे पास है। मैं भरपूर कोशिश करता हूँ, कि मेरा 'आज' ही सुधर जाए। ताकि तुम मेरे संघर्षों की थकान पर बस मरहम फेरते रहो। दो दिन पूर्व ही मैंने OVERTHINKING को भी पत्र लिखा था। उसे समझाया था, मनाया था, समझौते के लिए। अनुशासन, स्थिरता, और स्पष्टता के अलावा मुझे तुम से और कुछ भी तो नहीं चाहिए। फ़िलहाल जब यह पत्र लिख रहा हूँ, तो फिर से मेरी OVERTHINKING जागृत हो चुकी है, वह मुझे दो भिन्न दृष्टिकोण दिखा रही है।
पहला दृष्टिकोण तो याचक का ही है। एक प्रयत्नशील - संघर्षरत पुरुषार्थ की याचना। जो चाहता है, तुम्हारी ओर से एक संकेत। स्थिर शांति का संकेत। वह दृष्टिकोण याचना करता है, क्योंकि वह थका हुआ है, आज के परिश्रम से। आज की उड़ान के बाद हुए वातावरण के साथ घर्षण से उत्पन्न असंतुलन की लहरों से। वह थका हुआ है, क्योंकि वह सतत - यंत्रवत, अपने पुरुषार्थ को चमकाने के लिए घिस रहा है। वह इस लिए भी थका हुआ है, क्योंकि उसे इस बात का भय भी है, कि कहीं परिश्रम का परिणाम विपरीत न आ जाए।
दूसरा दृष्टिकोण याचना से विमुख होकर विश्वासी है, वह कहता है, तुम मेरे आधीन हो। मैं ब्रह्म हूँ, मैं ही तुम्हारा निर्माण करूँगा। मुझे अपनी क्षमता की कसौटी पर साबित हुए पुरुषार्थ पर विश्वास है। परिणाम मेरे पक्ष में ही होगा। मैं जैसा चाहूंगा, वैसा तुम्हे बनना होगा। मैं उन परिस्थितियों को भी अपने पक्ष में शामिल कर लूंगा, जिनके जोर पर तुम अपना मन-चाहा परिणाम बना सकते हो। मैं तुम पर उसी तरह नियंत्रण स्थापित कर सकता हूँ, जैसा नियंत्रण किसी सञ्चालन के संचालक में होता है।
संघर्ष, थकान और उम्मीद
मेरी OVERTHINKING से उपजे दोनों ही विचारों में एक बात समान है, वह है तुम्हारा अस्तित्व मेरे लिए सुखदायी हो, शुभ हो। मैं अपने बीते कल की तुलना में आज बेहतर हूँ, तो मेरा लेखाचित्र ऊपर की ओर बढ़ती इंगित रेखा में ही समाया है। यह मेरे लिए आश्वासन है, प्रेरणा भी। कि मैंने चुना पथ, अकंटक तो नहीं, लेकिन असंभव भी नहीं है।
मेरे अपने आज में मुझे इस बात का भी अहसास है, कि बीते कल में बहुत कुछ हो सकता था। बहुत सारे क्षतियाँ उभरकर सामने आती है, मेरे वर्तमान से मुझे डगमगाने को। लेकिन मैं तुम्हे बेहतर करने के लिए आजकी जटिलताओं को नीलकंठ की ही तरह पि जाता हूँ। अपने गले में मैंने बाँध रखा है, तुम्हारे दायित्वों की रस्सी, जिससे आज का विष तुम्हे न डस पाए। हाँ ! बीते कल से आया हुआ कुछ आज भी मेरे पास है। स्वप्न। जिन्हे तुम्हे सौंपा हुआ है, तुम्हारे अस्तित्व की प्रतिछाया देखते रहने के लिए।
मेरे कल के लिए एक छोटी-सी कामना
मेरी आज की कुछ आदतें तुम्हारे वर्तमान को जरूर से कष्ट दे रही होंगी, लेकिन तुम्हे भी उन्हें पालना होगा। आदतें नियंत्रित हो सकती है। मर्यादित हो सकती है। छूटती नहीं।
मेरे आने वाले कल, तू सुखी हो, शुभ हो, स्थिर हो।
शुभरात्रि।
तुम्हारा आज का मैं।
२९/०४/२०२६
|| अस्तु ||
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