एक साधारण शनिवार और असाधारण वेब सीरीज़
प्रियम्वदा !
आज का दिन भी काफी सही था। वेब सीरीज़ देखने में ही खपा दिया है। बड़ी सही वेब सीरीज़ थी यह। बहुत ज्यादा मजेदार.. काफी समय के बाद कोई ऐसी वेब सीरीज़ देखी है, जिसमे सब कुछ ही है। वह सब जो मैं एक वेब सीरीज़ में चाहता हूँ। वे तमाम भावनाएं... जो प्रेम या किसी एक संबंध से जुडी हुई होती है। जब भी कोई रिश्ता बनता है, वहां स्वामित्व का, तथा चिंता का, दोनों ही भाव अपने आप जुड़ जाते है। हम उनका हमेशा भला चाहते है, जो हमारे है, या जिन्हे हम अपना मानते है।
सुबह की टहल, गेंदा और शहर का शोर
आज सवेरे तो सात बजे उठ गया था। घर पर मेहमान है। और शहरी मकान होने के यह नुकसान भी है, कि कुछ कामों में एडजस्टमेंट करना पड़ता है। खासकर सर्दियों में नहाने के लिए गर्म पानी के लिए। सवेरे सवेरे सात बजे उठ जाने के बावजूद मेरा नहाने में नंबर आया आठ बजे। तब तक.. तब तक मैं टहलता रहा, दिलबाग में। प्रियम्वदा ! गेंदा तो अपनी पूरी ऋतु में आ चूका है। कमजोर ही सही, लेकिन कितने सारे फूल खिला रहा है। सवेरे सारे ही गमलों में पानी देते हुए, कुछ देर पौधों को ताज़गी महसूस की।
ऑफिस, खाली समय और ‘जिनी मेक अ विश’
ऑफिस के लिए निकला, तब तक नौ बज गए थे। दुकानपर कुछ देर स्टॉप लेकर निकला, सीधे ऑफिस पर। यूँ तो आज शनिवार के चलते काम था भी, और नहीं भी। बैंक बंद होने के बावजूद कईं काम को उनके गंतव्य तक पहुँचाना था। लेकिन मेरे पास इतना ज्यादा खाली समय भी था, कि तरह एपिसोड्स की एक वेब सीरीज़ पूरी देख सकूँ। देख ली, कल जिक्र किया था न मैंने..! "जिनी मेक अ विश।"
कोरियन ड्रामा की दुनिया और पहली झिझक
इंटरनेट पर कोरियन ड्रामा बहुत ज्यादा प्रख्यात है, ऐसा पता चला। एक तो ड्रामा, ऊपर से कोरियन.. सोचा ऐसा तो क्या है इसमें..? जलाशय की गहराई भीतर उतरे बिना तो कैसे पता चले? कोरियन ड्रामा की लिस्ट में एक सीरीज़ का नाम अच्छा लगा, "जिनी मेक अ विश।" पहले ट्रेलर देखा, अच्छा लगा। मजेदार.. सोचा पूरी देखनी चाहिए। कोरियन, जैपनीज़, चाइनीज़, यह सब मुझे एक जैसी शकल के लगते है। खासकर फिल्मों से जुड़े हुए। मेकअप करते है, तब भी पिले-पिले दीखते है। दुनिया में चार रंगी इंसान कह सकते है। गोरे (लाल), काले, ग्रे, और पिले..!
ख़ी-का-योंग और तीन ख्वाहिशों की कथा
इस वेब सीरीज़ की कहानी कुछ यूँ थी, कि एक लड़की है, जिसे बचपन में ही उसकी माँ ने उसकी नानी के पास छोड़ दिया था। लड़की बड़ी होते होते साइकोपैथ जैसी बन जाती है। फर्क इतना था, कि यह किलर साइकोपैथ नहीं थी। यह बस अपनी भावनाएं व्यक्त न करती, सिवा गुस्से के। न ख़ुशी, न दुःख, चेहरे पर यह कोई भाव आता ही नहीं। अरब देश में घूमने के लिए गयी थी, और उसे एक चिराग मिल गया। वही चिराग जिसमे जीन होने की कहानियां बड़ी मशहूर है। वही जिन जो तीन ख्वाहिश पूरी करता है।
कहानी काफी मजेदार थी, इस लड़की जिसका नाम ख़ी-का-योंग था, उसे असमय मिले इस चिराग को गंभीरता से नहीं लेती है। और उल्टा अपनी माता से अलग रहने का गुस्सा जिन पर निकालती है, जिन को मारने लगती है। जिन भी पूर्वजन्म के बंधनों से इसी लड़की के साथ बंधा हुआ था। आगे चलकर इस कहानी बहुत सारे मोड़ आते है। इस एक कहानी में रचनाकार ने प्रेम, विरह, मैत्री, वात्सल्य, ममत्व, क्रोध, शत्रुता, हास्य, करुणा, सारे ही रस डाले है। बहुत कम ऐसी मूवी, या वेब सीरीज़ होती है, जहाँ एक साथ यह सब कुछ हो।
प्रेम, विरह और जिन की अंतिम क़ुर्बानी
जब कहानी का अंत होता है, और जिन से आखरी ख्वाहिश वह मांगने वाली होती है, तब उसे पता चल जाता है, कि मैं अगर नेक ख्वाहिश मांगती हूँ, तो जिन मारा जाएगा। उसने अपने स्वार्थ से जुडी ख्वाहिश मांगनी चाही। वह भी नेक ख्वाहिश ही थी। और जिन मारा गया। विरहपूर्ण दृश्य था वह। प्रेम के बंधन में वह लड़की अरब के रेगिस्तान में अकेली भटकती है, रेत के टीलों पर उसके क़दमों की छाप कुछ देर ठहरती है, हवाओं के साथ मिट जाती है। इंसानों का अस्तित्व ही नहीं, वहां उस रेगिस्तान में वह अपने प्राण त्याग देती है।
मेकर्स का मोड़: मृत्यु के बाद भी जीवन
सीरीज़ का नायक और नायिका, दोनों ही मृत्यु को प्राप्त होते है। लेकिन मेकर्स ने कमाई का लाभ जीवित रखने के लिए आखरी एपिसोड में, विरह, दुःख और पीड़ा की भावना पर एक धीरी ब्रेक लगाकर पासा पलटते हुए, नायिका को मृत्यु के पश्चात जिनिया के स्वरुप में वापिस पृथ्वी पर भेजा। वहीं, उसका आशिक़ जो असल जिन था, वह इब्लिश भी धरती पर लौट सका, नायिका की नानी ने उसे धरती पर लौटने में मदद की थी। संक्षेप में कहूं तो, एक काफी ज्यादा मजेदार, रोचक, और आनंददायी वेब सीरीज़ थी।
कोरियन ड्रामा में भी अपनी ही तरह गोली लगने पर स्लो मोशन में, गिरने वाला ट्रेंड दिखा। मरते समय बहुत सारी बातें बताना, बॉलीवुड की ही तरह कोरियन ड्रामा में भी मौजूद है। बहुत कुछ एक जैसा है, बस नाम बड़े मुश्किल लगते है, और शक्लें..! हाँ ! इस सीरीज़ की नायिका बड़ी सुंदर दिखती है, कोरियन लुक में भी, और अरबी लुक में भी। खेर, सीरीज़ के अंतिम एपिसोड में वह विरहपूर्ण और पीड़ादायी दृश्य भी थे, जो एक प्रेम प्रसंग में होने चाहिए।
हिसाब-किताब, छूटी हुई रकम और बेचैनी
शाम ढल गयी। आखरी एपिसोड बाकी था। शनिवार के कारण कुछ हिसाब किताब समेटने थे। क्योंकि कल रविवार को लेबर का हिसाब करना होता है। तो सोचा आखरी एपिसोड घर जाकर देख लूंगा। यही सोचकर हिसाब करने बैठा, और एक गंभीर समस्या में फंस गया। एक कलम मिसिंग थी। हिसाब मिल नहीं पा रहा था। किसी को पैसे तो दिए थे, लेकिन लिखना भूल गया। और अब इतना मोटा फर्क आता देख, दिमाग की नसें सिकुड़ने लगी। मन व्यग्रता धारण करने लगा। ऑफिस के बहार चक्कर लगा आया, सोच सोचकर परेशान होने लगा था, कि आखिर कौन था, जिसे मैंने इस सप्ताह में पैसे दिए हैं। लेबर काम के लिए ही दिए होंगे, इतना तो तय था। लेकिन कौन?
सफेद रन की कल्पना और रात की खामोशी
काश इस सप्ताह में फ़िल्में देखते हुए काम पर भी इतना ही फोकस रख पाता। जब हम कहीं फंसते है, तो हमें तुरंत होनी कईं सारी गलतियों का अहसास होने लगता है। मैंने फिल्मे देखने के चक्कर में कईं बार जरुरी कामों को नज़रअंदाज किया है। आखिरकार पुष्पा ने याद दिलाया, मंगलवार को एक टूटी हुई दिवार ठीक करवाई थी। उसकी मजदूरी में कुछ रकम दी थी। उसके अलावा मशीनों पर मच्छरों के बेहद त्रास के चलते, दवाई छिड़कवाने का मशीन मंगवाया था, उसके लिए भी पैसे दिए थे। आखिरकार छहसौ रूपये का हिसाब में फर्क बाकि रहा। इतना तो चलता है। यह सोचकर किताबे बंद की।
घर से फोन आया, पता चला, मेहमान लोग कच्छ का सफेद (वाइट) रन देखने गये है। नमक की एक परत.. जो सैंकड़ों मील जमीन पर फैली हुई है। मैंने भी आज तक यह सफेद रन नहीं देखा है। लेकिन मैंने नमक की बड़ी बड़ी टेकड़ियाँ देखि है, इतनी बड़ी टेकरी, कि उसकी चोटी पर चलता हुआ jcb भी बिलकुल छोटा दिखाई पड़े। खेर, घर पहुंचकर भोजनादि से निवृत होकर उस वेब सीरीज़ का अंतिम एपिसोड देखने लगा था। और उसके बाद यह दिलायरी लिखने बैठ गया।
तीन इच्छाएँ और मेरा मौन उत्तर
प्रियम्वदा ! मैं यह लिखते हुए सोच रहा था, कि मैं या मेरे जैसे कितने सारे लोग होंगे, जिन्हे यह पता ही नहीं कि उनकी वास्तविक ख्वाहिश है क्या? इच्छाएं बहुत सारी होती है, समय-असमय उठती है, मन को आपूर्ति के लिए विवश करती है, और उस इच्छा के पूरी होने पर कुछ समय के लिए आनंद भी रहता है। लेकिन फिर? फिर नई इच्छा.. नया उद्यम। मैं अभी यही सोच रहा था, कि अभी इसी समय कोई मुझसे मेरी तीन इच्छाएं पूछ लेता है, तो मैं क्या कहूंगा..? मेरे पास इस प्रश्न का कोई उत्तर है ही नहीं।
शुभरात्रि।
१३/१२/२०२५
|| अस्तु ||
प्रिय पाठक !
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