होली 2026: युद्ध की आहट, शहर की हलचल और एक साधारण दिन की असाधारण कहानी

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शहर, खरीदारी और पौधों की नई शुरुआत

    प्रियम्वदा !

    मार्च का पहला दिन बढ़िया था वैसे। खर्चालु दिन भी कह सकता हूँ। यह सिस्टम किसने बनाया होगा.. कि पहले कमाओ, फिर खर्च करो, और फिर कमाओ। सवेरे छह बजे उठकर कसरत करने का ढोंग किया। नाहा-धोकर तैयार होकर जगन्नाथ। फिर दुकान, और फिर ऑफिस। रविवार होने के बावजूद नौ बजे ऑफिस पहुँच गया था। इतना जल्दी ऑफिस पहुँच जाने का एकमात्र कारण सरदार की गैरहाजरी है। सरदार विदेश गया है, हाँ ! युद्धकाल है, लेकिन वह पूर्व दिशा में गया है। 


Indian man gardening on a rooftop while checking global war news on his smartphone, minimal cartoon illustration on white background with subtle Holi colors.


    यूँ समझो प्रियम्वदा, कि लगभग बारह बजे तक मैंने सारे काम निपटा दिए थे। सब कुछ समेटकर साढ़े बारह बजे तक तो घर के लिए निकल पड़ा था। दोपहर को एकाध झपकी ली, और फेब्रिकेशन वाले के वहां चल पड़ा। चार पैरो वाली सीढ़ी बनाने को दी थी एक लोहे की। वह बन चुकी थी। उसे ले घर आया। और फिर फॅमिली को शहर दिखाने ले गया। कुँवरुभा को कपडे लेने थे, वह दिलवाये, साथ में होली की पिचकारियां वगैरह भी। एक तो यह महानगरपालिका ने जगह जगह खोद रखा है। जगह जगह तोड़-फोड़ की है। कुछ कुछ ईरान जैसा ही हाल हे मेरे शहर का भी। बुलडोज़र घूमते ही रहते है मेरे शहर में। यह तोड़ दो, वह तोड़ दो.. बनवाने की जल्दी नहीं है। मेरी ही सोसायटी के नए बन रहे रोड में बिछ चुकी रोड़ी पिछले आठ दिनों से बस इंतजार में पड़ी है, कि कब उन्हें आरसीसी की चादर ओढ़ाई जाए। 


    सारी खरीदारी के बाद बस मेरी एक खरीदारी बाकी रहती थी। मैं फिर से उस नर्सरी पर चल दिया। कुँवरुभा कार से उतरते ही बोल पड़े, "नर्सरी है ये?" मैंने हाँ में सर हिलाया। तो बोले, "बेकार है।" उनके लिए छोटी नर्सरी मतलब बेकार है। वही कली उसी कुर्सी से खड़ी हुई। मैंने उससे कहा, मुझे छाँव वाले पौधे दो, जिन्हे कम धूप चाहिए वैसे पौधे। उसने तरह तरह के पौधे दिखाए। मैंने एक फैन पाम, एक एलिफेंट एअर, और एक लाल पत्तों वाला कोर्डिलाइन खरीद लिया। पांच किलो वर्मीकम्पोस्ट भी। 


    गमलों में पौधे लगाते हैं, तो गमले में निचे एक ड्रैनेज होल होना बड़ा जरुरी है। मेरे एक भी गमले में ऐसा कोई होल है नहीं। गमला अगर मिटटी का है, या सीमेंट का है, या फिर प्लास्टिक का, सबमे निचे होल होना जरुरी है। मैंने तीन गमलों में होल करने के खूब प्रयास किए, लेकिन बड़ा ज़िद्दी प्लास्टिक था। पेचकस भी बेकार साबित हुआ, और आटेवाला स्क्रू भी। फिर क्या, गैस के चूल्हे पर एक चाक़ू गरम किया, और गमले में होल करने के बजाए लंबे लंबे चीरे मारे। इन्शोर्ट पानी नहीं रुकना चाहिए। गमले में पानी रुका रहा, तो दलदल जैसा हो जाएगा। और पौधों की जड़ें गलने लगेगी। 


    अँधेरा हो चूका था। छत पर लाइट का कोई बंदोबस्त है नहीं। मोबाइल की टोर्च से ही एक तसले में मिट्टी, रेत और वर्मीकम्पोस्ट मिलाकर साइल मिक्स तैयार किया। हालाँकि यह तीनों कम पड़ा था तीसरे गमले के लिए। गमले में निचे ईंट के टुकड़े डालकर ऊपर थोड़ी मिट्टी भरी, और फिर प्लांट रखकर यह साइल मिक्स मिला दिया। और फिर तीनों को सोलर के निचे वहां रख दिया, जहां बिलकुल ही धूप नहीं आती। इसी बिच टेकोमा, रोज, और इक्सोरा के पौधे कम धूप के चलते कमजोर से हो गए थे। तो उन्हें भी जहाँ आधा दिन धूप मिले वहां शिफ्ट कर दिया। अब या तो ऋतु का प्रभाव है, या तो धूप का कमाल, लेकिन टेकोमा के तो पीले फूल धूप में आते ही खिलने लगे। 


वैश्विक तनाव: ईरान-इजराइल युद्ध और मिडिल ईस्ट संकट

    खैर, दुनियादारी देखो तुम प्रियम्वदा ! एक तरफ दुनिया है, एक तरफ अकेला ईरान। मिडिल ईस्ट या अपने नजरिये से दक्षिण पश्चिम एशिया में भारी जंग मची हुई है। शनिवार से शुरू हुई इस जंग में एक तरफ ईरान है, एक तरफ इजराइल और अमेरिका। इजराइल और अमेरिकी जोड़ी ने पहले दिन ही ईरान के सर्वे-सर्वा अयातोल्ला अली ख़ामेनई को मार दिया। जंग शुरू होने से पहले ही एकतरफा कर दी गयी। युद्धों का नियम ही बदल चूका है प्रियम्वदा ! युद्ध की घोषणा करने से पूर्व ही शत्रु को मार दिया। पहले के युद्धों में शत्रु के मरते ही युद्ध को समाप्त कर दिया जाता था। लेकिन यहाँ उल्टा है, शत्रु को युद्ध की घोषणा से पूर्व ही मार दिया। शत्रु के मर जाने के उपरांत युद्ध की घोषणा की गयी। और अब ईरान में जगह जगह हमले हो रहे है। 


    ईरान ने भी जबडातोड़ जवाब देते हुए खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकन मिलिट्री बेस पर मिसाइल और ड्रोन की लड़ी बरसा दी। अब ईरान के सामने इजराइल, यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ़ अमेरिका, बहरीन, कुवैत, जॉर्डन, ओमान, क़तर, सऊदी अरब, यूनाइटेड अरब अमीरात, तथा यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, और जर्मनी भी कूद पड़े है। पहला हमला इजराइल ने किया था। यूएसए मदद में आया। और फिर ईरान ने उपरोक्त खाड़ी देशों मे अमरीकी संस्थानों पर धावा बोल दिया। स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज ईरान ने बंद कर दी, और दुनिया का बिस से तीस प्रतिशत आयल सप्लाई यहीं से गुज़रता है। अब सारे परेशान है। 


भारत, पाकिस्तान और रणनीतिक कयास

    ठीक इसी समय रूस और यूक्रेन का युद्ध तो जारी ही है। उपरांत पाकिस्तान अफ़ग़ानिस्तान वाला मामला भी जोर में है। इसी बिच पुष्पा लगातार ईरान वाला मामला सुने जा रहा था। हालाँकि उसे यह शौख भी मुझसे ही मिला है। असल में तो मैं ही लगातार यह खबरे सुने जा रहा था। युद्ध की खबरें मुझे बड़ा आकर्षित करती है। 


    "तो अब ईरान तो गया..? खामनेई ही नहीं है, तो नेतृत्व कौन करेगा?" पुष्पा ने अपने फ़ोन स्क्रीन पर चलती खबरों में नजरे गड़ाए ही पूछा।


    "अरे कहाँ? ईरान के पास नेतृत्व होगा ही, तभी तो रिटलिएट कर रहा है।" मैंने बेदारकारी से जवाब दिया।


    "मैं सोच रहा था, अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान का मामला भी मैदान में चल ही रहा है। तो आपको क्या लगता है भारत को अफ़ग़ानिस्तान की मदद नहीं करनी चाहिए?" पुष्पा ने मेरी तरफ देखते हुए कहा।


    "हाँ ! वैसे मैं सोच भी रहा था। मुझे लगता है, भारतीय थल सेना को कम से कम पाकिस्तान बॉर्डर की दिशा में एक मूवमेंट तो करनी ही चाहिए। दो-तीन रेजिमेंट, एकाध आर्टिलरी, और एकाध विक्रांत को पाकिस्तान की दिशा में भेज दिया जाए, और एक बढ़िया सी अफवाह उड़ाई जाए, कि भारत पाकिस्तान पर हमले की तैयारी कर रहा है, तो पाकिस्तान उधर अफ़ग़ानिस्तान में थोड़ा बहुत फंसा हुआ है ही, दो फ्रंट पर लड़ने के नाम पर वह तो पानी में ही बैठ जाएगा।" मैने बात में थोड़ा मजाक मिलाते हुए कहा।


    "आईडिया अच्छा है, दो तीन राफेल भी भेज देने चाहिए पाकिस्तान की दिशा में, भले ही वे बॉर्डर से पहले ही यूटर्न ले ले। इसी बहाने पाकिस्तान के राडार एक्टिवटे हो जाएंगे। उनको लगेगा की भारत की एयरफोर्स भी हमला करने आ रही है।" उस मजाक को पुष्पा आगे बढ़ाते हुए बोला।


    "अरे वो सुना, पाकिस्तान में ख़ामेनई की मृत्यु के बाद कराची स्थित अमेरिकन कांसुलेट को जाहिलों ने घेर लिया। पहले तो जोश जोश में पथ्थर ले-लेकर कांसुलेट ऑफिस के शीशे तोड़ ने लगे। शीशा इतना मजबूत था, कि पथ्थर मारने पर भी नहीं टूट रहा था। फिर तो कॉन्सुलेट के सिक्योरिटी वालों ने फायरिंग खोल दी, तब यह जाहिल 'ना करें जनाब ना करें..' कहते हुए भागने लगे। पीठ दिखाकर भागते हुए लगभग दस जाहिल वही ढेर हुए।" मैंने गंभीर लेकिन मजाकिया मुद्रा में कहा।


    "हाँ ! सुना था.. जाहिल हमेशा जाहिल ही रहेंगे। जाहिल बार बार भूल जातें है, कि है तो उनका मुल्क एक फेंकी हुई हड्डी उठाने वाला जानवर ही। पाव पाव किलो के एटम बम बना लेने से क्या हो जाएगा। अभी तो उन्हें पता नहीं है, कि इजराइल का ईरान के बाद अगला टारगेट वही लोग होंगे।" स्थिरता के भाव से पुष्पा बोला। 


    "वो सब छोड़, तुझे पता है, किसी के पास सब तरह के खिलौने है, लेकिन उसके साथ कोई खेल ही नहीं रहा है.. वह कौन है?" मैंने बात को दूसरी दिशा में ले जाने के इरादे से कहा।


    "हैं? यह कैसा सवाल है?" पुष्पा सोचते हुए बोला।


    "अरे ठीक से याद कर, एक बच्चा ऐसा है, उसके पास सारे खिलौने है, लेकिन मोहल्ले के दूसरे बच्चे आपस में खेल रहे है, उसे नहीं खिला रहा कोई भी।" बात को ज्यादा स्पष्ट करते मैंने कहा। 


    "हाँ ! अबकी बार समझ गया। लेकिन उसके साथ कोई कैसे खेलेगा.. वो तो सनकी बच्चा है, बन्दूक की गोली जा जवाब मिसाइल से देता है। वह तो कुख्यात है। बेचारा किम जोंग उन।" पुष्पा ने पहेली को सुलझाते हुए जवाब दिया।


    "युद्ध करना सबके नसीब में कहाँ? जिसे नहीं करना है, उसके पाले में आकर बैठता है यह युद्ध। जिसे युद्ध चाहिए है, वह सामने से झगड़ते कुत्ते की तरह दौड़ लगा रहा है। मुझे तो लगता है पाकिस्तान भी अफ़ग़ानिस्तान में औंधे मुँह की खाएगा। आज ही खबर में सुना, कि पाकिस्तान पेंतीस किलोमीटर अंदर घुस चूका है अफ़ग़ानिस्तान में। मुल्ला मुनीर भूल गया है क्या, कि अफ़ग़ानिस्तान की यही युद्ध निति रही है पिछले कईं सालों से। वह पहले दुश्मन को अपने भीतर घुसने देता है। और फिर उसे धीरे धीरे निगलने लगता है। यूएसएसआर और अमेरिका भी कितने सालों तक फंसे रहे थे अफ़ग़ानिस्तान में। अब यह जाहिल मुनीर भीतर घुसने की कोशिश कर रहा है।" मैंने जाहिलिस्तान को फटकारते हुए कहा।


    "हाँ ! बात तो सही है। अफ़ग़ानिस्तान पहले दुश्मन को अपने देश में आसानी से अंदर तक आने देता है। और बाद में घेर कर मारता है। शिकार करता है पठान।" पुष्पा ने मेरी हाँ में हाँ मिलाते कहा। 


 होली की उलझन: छुट्टी कब, रंग कब?

    "चलो, होलिकादहन होना है, इस बार तो गब्बर का सवाल भी सच साबित होता जा रहा है। होली कब है, कब है होली..?" मैंने होली पर मची हलचल के बारे में बताया।


    "क्यों?" पुष्पा ने नासमझते हुए कहा।


    "देख, होलिकादहन तो आज है। लेकिन कल खाली दिन है, रंगों से खेलने वाली धुलंडी तो परसो चार तारीख को है। अब देख, आज होलिकादहन हो जाएगा, कल होली खेलने के बजाए ऑफिस आना पड़ेगा, क्योंकि सरकारी छुट्टी है नहीं। लेकिन अपने यहाँ लोग कल खेलने वाले है। पर मुझे ऑफिस आना पड़ेगा, क्योंकि काम है। अब चार तारीख को सरकारी छुट्टी है, काम बंद रहेगा, लेकिन खेलने वाली होली तो जा चुकी होगी। मुझे तो समझ ही नहीं आ रहा है, करें तो करें क्या?" मैंने अपनी दुविधा बताई।


    "चलो ! अभी तो घर चलो, आठ बज गए।" कहते हुए पुष्पा ने अपना बैग कंधे पर टांग लिया। 


    चलो फिर प्रियम्वदा, विदा दो, जब हो तब लेकिन हैप्पी होली.. तुम्हे होली की अनंत शुभकामनाएं। रंगो का त्यौहार सबके जीवन में खुशहाली के रंग भर दे। 

    शुभरात्रि। 

    ०२/०३/२०२६

|| अस्तु ||


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